यूएई को ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सहायता से ईरान का निशाना बनने की संभावना कम: विशेषज्ञ

यूएई को ऑस्ट्रेलिया की रक्षा सहायता से ईरान का निशाना बनने की संभावना कम: विशेषज्ञ

नई दिल्ली/कैनबरा, 10 मार्च:
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ द्वारा संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को रक्षा सहायता देने की घोषणा के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इससे ईरान ऑस्ट्रेलिया को निशाना बना सकता है। हालांकि एक अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ का कहना है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच ईरान का मुख्य ध्यान अन्य देशों पर रहेगा और ऑस्ट्रेलिया उसके सीधे निशाने पर आने की संभावना कम है।

ऑस्ट्रेलिया ने मंगलवार को खाड़ी क्षेत्र में एक E-7A वेजटेल निगरानी विमान, उसके संचालन के लिए आवश्यक रक्षा कर्मियों और मध्यम दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें भेजने की घोषणा की। यह कदम यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के अनुरोध पर उठाया गया है।

प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ और रक्षा मंत्री रिचर्ड मार्लेस ने स्पष्ट किया कि ऑस्ट्रेलिया द्वारा भेजे जा रहे हथियार और सैन्य संसाधन पूरी तरह रक्षात्मक उद्देश्य के लिए हैं। उनका कहना है कि इनका मकसद खाड़ी क्षेत्र, खासकर यूएई में रह रहे बड़ी संख्या में ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

रक्षा मंत्री मार्लेस ने कहा, “ये सभी हथियार और संसाधन रक्षात्मक प्रकृति के हैं। हमारे सैनिक और उपकरण वहां केवल सुरक्षा सहयोग के लिए भेजे गए हैं।”

मेलबर्न विश्वविद्यालय की अंतरराष्ट्रीय संबंध विशेषज्ञ मेलिसा कॉनली टायलर के अनुसार, इस कदम से ईरान के लिए ऑस्ट्रेलिया प्राथमिक लक्ष्य नहीं बनेगा। उनका कहना है कि यदि क्षेत्रीय संघर्ष बढ़ता भी है तो ईरान का ध्यान मुख्य रूप से मध्य-पूर्व के बड़े सैन्य और रणनीतिक खिलाड़ियों पर रहेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऑस्ट्रेलिया की यह तैनाती सहयोगी देशों की सुरक्षा मजबूत करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए की गई है, न कि किसी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के लिए।

हालांकि, मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर सुरक्षा और कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं और कई देश स्थिति पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।