ईरान युद्ध से वैश्विक बाजार में हड़कंप: 80 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट, तेल संकट से महंगाई बढ़ने की आशंका

G7 देशों की आपात बैठक, तेल आपूर्ति संकट से दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर खतरा

ईरान युद्ध से वैश्विक बाजार में हड़कंप: 80 अरब डॉलर से अधिक की गिरावट, तेल संकट से महंगाई बढ़ने की आशंका

मध्य-पूर्व में ईरान से जुड़े बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक बाजारों में भारी उथल-पुथल मच गई है। युद्ध की आशंका और तेल आपूर्ति में बाधा के चलते अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों में तेज गिरावट दर्ज की गई है, जिससे अरबों डॉलर की संपत्ति मिट गई। विशेषज्ञों के अनुसार इस संकट ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं में नए ऊर्जा संकट और महंगाई बढ़ने की आशंका पैदा कर दी है।

रिपोर्टों के मुताबिक संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई हैं और कुछ बाजारों में यह 115 डॉलर के आसपास तक पहुंच चुकी हैं। तेल की कीमतों में इस तेज उछाल ने वैश्विक बाजारों में घबराहट पैदा कर दी है और एशिया व ऑस्ट्रेलिया के शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। ()

विश्लेषकों का कहना है कि ईरान के आसपास स्थित हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति गुजरती है। युद्ध के कारण इस मार्ग में बाधा आने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे पेट्रोल, गैस और परिवहन की लागत बढ़ने का खतरा है। ()

इस स्थिति को देखते हुए दुनिया के प्रमुख औद्योगिक देशों के समूह G7 ने आपात बैठक बुलाने का निर्णय लिया है। बैठक में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा भंडार जारी करने और तेल आपूर्ति को स्थिर रखने जैसे कदमों पर चर्चा की जाएगी। ()

आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में महंगाई दर के तेजी से बढ़ने की आशंका जताई जा रही है और कुछ अनुमान बताते हैं कि आने वाले महीनों में महंगाई लगभग 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। ()

उधर, शेयर बाजारों में गिरावट से निवेशकों में भी चिंता बढ़ गई है। कई देशों के बाजारों में एक ही दिन में अरबों डॉलर का नुकसान दर्ज किया गया, जबकि ऊर्जा कंपनियों के शेयरों में उल्टा तेजी देखी गई क्योंकि तेल कीमतों में उछाल से उन्हें लाभ होने की संभावना है। ()

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला तो यह संकट 1970 के दशक के तेल संकट जैसी स्थिति पैदा कर सकता है, जिससे वैश्विक आर्थिक मंदी और महंगाई दोनों बढ़ सकती हैं।