ईरान ने परमाणु निगरानी पर कसा शिकंजा, संसद ने IAEA सहयोग किया निलंबित

ईरान ने परमाणु निगरानी पर कसा शिकंजा, संसद ने IAEA सहयोग किया निलंबित

तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद ईरान की संसद ने एक बेहद अहम और संभावित रूप से वैश्विक प्रभाव डालने वाला बिल पास किया है। इस विधेयक के अनुसार, ईरान अब अंतरराष्ट्रीय परमाणु निगरानी संस्था IAEA (इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी) के साथ अपने सहयोग को आंशिक रूप से निलंबित करेगा।

इस बिल का पारित होना अमेरिका के हालिया सैन्य हमले के बाद आया है, जिसमें ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया था। ईरान की संसद में इस विधेयक को भारी बहुमत के साथ पारित किया गया। इस कदम को अमेरिका के 'आक्रामक रवैये' का जवाब माना जा रहा है।

क्या बोले ईरानी सांसद?

ईरानी सांसदों ने इसे देश की संप्रभुता की रक्षा और पश्चिमी दबाव के खिलाफ 'रणनीतिक प्रतिक्रिया' बताया है। इस बिल के तहत अब ईरान IAEA को अपने कुछ संवेदनशील परमाणु स्थलों तक निरीक्षण की अनुमति नहीं देगा।

क्या बढ़ेगा खतरा?

पश्चिमी देशों, खासकर अमेरिका और इस्राइल, ने इस फैसले पर गंभीर चिंता जताई है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ईरान का परमाणु कार्यक्रम और भी गोपनीय हो सकता है और यदि अंतरराष्ट्रीय निगरानी कमजोर हुई, तो परमाणु हथियार निर्माण की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

हालांकि, ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है।

वैश्विक प्रतिक्रिया

अमेरिका ने इसे "गंभीर और खतरनाक कदम" करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे को उठाने की चेतावनी दी है। वहीं रूस और चीन जैसे देश, जो ईरान के करीबी माने जाते हैं, इस मुद्दे पर फिलहाल सतर्क प्रतिक्रिया दे रहे हैं।

निष्कर्ष

ईरान के इस कदम से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है। आने वाले दिनों में यदि कूटनीतिक प्रयास नहीं हुए, तो यह परमाणु संकट एक बार फिर वैश्विक शांति के लिए गंभीर चुनौती बन सकता है।