नागपुर, 16 अगस्त 2025
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि दुनिया में बढ़ते संघर्षों को रोकने के लिए पूरे विश्व को भारतीय धर्म और अध्यात्म की जरूरत है। नागपुर में आयोजित धर्म जागरण न्यास के कार्यालय लोकार्पण कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि विविधताओं को सहज ढंग से स्वीकार न कर पाने के कारण विश्व भर में तनाव और युद्ध की स्थितियां बन रही हैं।
भागवत ने कहा, “दुनिया में चल रहे संघर्ष इसलिए हैं क्योंकि लोग एक-दूसरे की विविधताओं को स्वीकार नहीं कर पाते। भारत का धर्म यही सिखाता है कि भिन्नताओं के बावजूद एक साथ कैसे जिया जाए। यही शिक्षा आज पूरी दुनिया को चाहिए।”
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को दुनिया उसकी अर्थव्यवस्था के कारण नहीं, बल्कि अध्यात्म के कारण विश्वगुरु मानती है। उन्होंने कहा कि भारत की पहचान केवल आर्थिक ताकत से नहीं है, बल्कि दूसरों के साथ खुशियां बांटने और आध्यात्मिक ज्ञान देने की क्षमता से है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर बोलते हुए भागवत ने कहा, “भारत जल्द ही 3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा, लेकिन यह कोई अनोखी बात नहीं है। अमेरिका, चीन सहित कई देश पहले ही अमीर हैं। परंतु भारत जैसा आध्यात्मिक ज्ञान और परंपरा किसी के पास नहीं है।”