न्यूज डेस्क | सिडनी
ऑस्ट्रेलिया में जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन देश छोड़ने वालों की संख्या में तेज़ी से इज़ाफा हो रहा है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, महामारी के बाद पहली बार इतनी बड़ी संख्या में लोग ऑस्ट्रेलिया से बाहर जा रहे हैं, जिससे कई सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसके पीछे क्या वजहें हैं।
क्यों हो रही है निकासी?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई आर्थिक और नीतिगत कारण हैं। बढ़ती महंगाई, किराए में बेतहाशा वृद्धि, घरों की कमी, स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव, और नौकरी की अनिश्चितता जैसे कारकों ने लोगों के लिए ऑस्ट्रेलिया को एक महंगा और संघर्षपूर्ण देश बना दिया है।
वीजा सिस्टम बना बड़ा फैक्टर
हालांकि जनसंख्या वृद्धि पूरी तरह से रुक नहीं रही है क्योंकि अस्थायी और स्थायी वीज़ा के माध्यम से विदेशियों का आना अब भी जारी है। ऑस्ट्रेलिया सरकार विशेष रूप से स्किल्ड माइग्रेंट्स और इंटरनेशनल स्टूडेंट्स को वीजा दे रही है, जिससे देश में आने वाले लोगों की संख्या बनी हुई है। लेकिन दूसरी ओर, बहुत से ऑस्ट्रेलियाई नागरिक और स्थायी निवासी विदेशों में बेहतर जीवन की तलाश में देश छोड़ रहे हैं।
जनसंख्या वृद्धि धीमी, लेकिन प्रवास दर ऊंची
ऑस्ट्रेलिया के सांख्यिकी विभाग (ABS) के आंकड़ों के मुताबिक, इस साल की पहली तिमाही में 1.5 लाख से अधिक लोगों ने देश छोड़ा। जबकि पिछले कुछ वर्षों में यह संख्या अपेक्षाकृत कम थी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रवृत्ति दर्शाती है कि लोगों का भरोसा ऑस्ट्रेलियाई जीवनशैली और आर्थिक अवसरों में पहले जैसा नहीं रहा।
क्या कहती है सरकार?
सरकार का तर्क है कि वह आव्रजन नीति में बदलाव करके देश की श्रमशक्ति को मजबूत करने और जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रही है। लेकिन आलोचकों का कहना है कि मौजूदा वीजा सिस्टम अस्थायी प्रवासियों पर बहुत अधिक निर्भर हो गया है, जिससे स्थायित्व की भावना खत्म होती जा रही है।
निष्कर्ष
जहां एक ओर ऑस्ट्रेलिया विदेशों से कुशल श्रमिकों और छात्रों को आकर्षित करने की नीति अपना रहा है, वहीं देश के अपने नागरिक बड़ी संख्या में विदेशों का रुख कर रहे हैं। यह विरोधाभास ऑस्ट्रेलिया की मौजूदा सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है — क्या यह देश अब अपने नागरिकों के लिए रहने लायक नहीं रह गया है?