इस्लामाबाद/लाहौर। पाकिस्तान इन दिनों गंभीर आटे के संकट से जूझ रहा है। हालात इस कदर बिगड़े कि पंजाब प्रांत ने गेहूं और आटे की आपूर्ति पर अघोषित रोक लगा दी। इसकी वजह से अन्य प्रांतों—खासतौर पर खैबर पख्तूनख्वा (KP)—में दाम आसमान छू रहे हैं।
पंजाब फ्लोर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष रियाजुल्ला खान का कहना है कि प्रांत की सीमाओं पर चौकियां स्थापित कर दी गई हैं, जिससे अन्य इलाकों में गेहूं और आटे का परिवहन रोका जा रहा है। नतीजतन, KP में 20 किलो आटे का बैग 2,800 पाकिस्तानी रुपये तक बिक रहा है, जबकि पंजाब में यही बैग करीब 1,800 रुपये में उपलब्ध है।
KP के गवर्नर फैसल करीम कुंडी ने इस कदम को संविधान के अनुच्छेद 151 का उल्लंघन और "राष्ट्रीय एकता के खिलाफ" बताया है। वहीं पंजाब सरकार का तर्क है कि प्रतिबंध जमाखोरी और तस्करी रोकने तथा स्थानीय उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं। उनका कहना है कि गेहूं को अन्य प्रांतों में ऊंचे दाम पर बेचने की बजाय स्थानीय बाजार को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
पाकिस्तान में प्राकृतिक आपदाओं और कम उत्पादन के चलते पहले भी 2020, 2022 और 2023 में इसी तरह का संकट देखा जा चुका है। पहले पंजाब सरकार हर साल फसल कटाई के समय 40 लाख टन से अधिक गेहूं खरीदकर भंडारण करती थी, जिससे बाजार में स्थिरता बनी रहती थी। लेकिन अंतरराष्ट्रीय समझौतों के दबाव में यह नीति धीरे-धीरे कमजोर कर दी गई।
सिंध और खैबर पख्तूनख्वा जैसे प्रांत, जो पंजाब की गेहूं आपूर्ति पर निर्भर हैं, अब खुले तौर पर विरोध जता रहे हैं। उधर, पंजाब सरकार अपने फैसले को खाद्य सुरक्षा का हवाला देकर सही ठहराती रही है। इस विवाद ने न केवल प्रांतों के बीच खटास पैदा की है, बल्कि आम जनता की रसोई तक पर असर डाल दिया है।