एनआरएल में बवाल: वेस्ट्स टाइगर्स के खिलाड़ियों ने किया आपत्तिजनक’ इशारा, बुलडॉग्स समर्थकों में आक्रोश

एनआरएल में बवाल: वेस्ट्स टाइगर्स के खिलाड़ियों ने किया आपत्तिजनक’ इशारा, बुलडॉग्स समर्थकों में आक्रोश

सिडनी: रविवार को एनआरएल (नेशनल रग्बी लीग) में वेस्ट्स टाइगर्स और कैंटरबरी बुलडॉग्स के बीच हुए मैच ने खेल से ज़्यादा विवाद की वजह से सुर्खियां बटोरीं। मुकाबले में टाइगर्स ने बुलडॉग्स को 28-14 से चौंकाते हुए हरा दिया, लेकिन चर्चा में रहा एक आपत्तिजनक इशारा, जिसे खिलाड़ियों ने मैच के दौरान बुलडॉग्स समर्थकों की ओर किया।

जीत के अंतिम क्षणों में, जब समुएला फाइनू ने निर्णायक ट्राई किया, तो टाइगर्स के खिलाड़ी जश्न मनाने लगे। इसी दौरान समुएला फाइनू, लातु फाइनू और ब्रेंट नाडेन को एक खास हाथ का इशारा करते हुए देखा गया, जिसे ‘खोद’ कहा जाता है। यह इशारा मासूम दिखता है, लेकिन इसका मतलब बेहद आपत्तिजनक होता है।

क्या है 'खोद'?
‘खोद’ शब्द अरबी में ‘ले’ (Take) के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन जब इसे एक खास हाथ के इशारे के साथ किया जाए — जिसमें हथेली ऊपर उठाकर, बीच की ऊंगली को नीचे झुका दिया जाता है — तो इसका तात्पर्य अश्लील गाली के रूप में लिया जाता है। सोशल मीडिया पर यह इशारा लोकप्रिय हुआ है, जहां कुछ लोग इसे ‘लेबनानी अंदाज़ में गाली’ बताते हैं।

एनआरएल के सुपरफैन जीन-क्लॉड बिटार ने इस इशारे का वीडियो बनाकर समझाया था, जो अब वायरल हो रहा है।

बुलडॉग्स समर्थकों का आक्रोश
कैंटरबरी बुलडॉग्स के प्रशंसक, जिनमें बड़ी संख्या में अरब समुदाय के लोग शामिल हैं, इस इशारे से आहत हुए हैं। मैच के दौरान कैमरे ने रिकॉर्ड किया कि न केवल टाइगर्स के खिलाड़ी यह इशारा कर रहे थे, बल्कि कुछ बुलडॉग्स समर्थक भी जवाब में वही इशारा करते दिखे।

अब बुलडॉग्स क्लब ने इस मामले में आधिकारिक शिकायत एनआरएल इंटेग्रिटी यूनिट से की है। क्लब को प्रशंसकों से कई शिकायतें प्राप्त हुई हैं। एनआरएल ने पुष्टि की है कि वह सोमवार को इस मामले पर औपचारिक रूप से बयान देगा।

विवाद के बीच टाइगर्स की चुप्पी
अब तक वेस्ट्स टाइगर्स क्लब या खिलाड़ियों की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर फैंस दो खेमों में बंट चुके हैं — कुछ इसे ‘भावनाओं में बहा हुआ मज़ाक’ मान रहे हैं, तो कुछ इसे ‘सीधा अपमान’ बता रहे हैं।

एनआरएल के लिए चुनौतीपूर्ण स्थिति
एनआरएल जैसे पेशेवर खेल के मंच पर इस तरह की सांस्कृतिक और भाषाई संवेदनशीलता को नजरअंदाज करना लीग की साख पर सवाल खड़े कर सकता है। अब सबकी नजरें एनआरएल के सोमवार के फैसले पर टिकी हैं कि क्या खिलाड़ियों पर कोई कार्रवाई होती है या मामला यहीं ठंडा कर दिया जाता है।