सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया के केंद्रीय बैंक Reserve Bank of Australia (आरबीए) द्वारा इस सप्ताह नकद ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि किए जाने के बाद देश के प्रमुख बैंकों ने बचत खातों पर ब्याज दरें बढ़ाने की घोषणा शुरू कर दी है। इस कड़ी में Westpac चार बड़े बैंकों में पहला बैंक बन गया है, जिसने अपने ग्राहकों को पूरी दर वृद्धि का लाभ देने का ऐलान किया है।
वेस्टपैक ने गुरुवार को जारी बयान में कहा कि वह 13 फरवरी से अपने सेविंग अकाउंट धारकों के लिए नई ब्याज दरें लागू करेगा। उल्लेखनीय है कि बैंक ने पहले बचत खातों की दरें बढ़ाने का फैसला किया है, जबकि गृह ऋण (होम लोन) की बढ़ी हुई दरें चार दिन बाद प्रभावी होंगी।
बैंक के अनुसार, वेस्टपैक लाइफ सेविंग अकाउंट पर ब्याज दर बढ़कर अधिकतम 4.50 प्रतिशत प्रति वर्ष हो जाएगी। वहीं 18 से 34 वर्ष की आयु के ग्राहकों के लिए यह दर 5.25 प्रतिशत तय की गई है, जो वर्तमान में प्रमुख बैंकों में सबसे अधिक मानी जा रही है।
हालांकि, इन आकर्षक दरों के साथ शर्तें भी जुड़ी हैं। ग्राहकों को हर महीने न्यूनतम जमा और अन्य निर्धारित मानदंड पूरे करने होंगे। शर्तें पूरी न होने की स्थिति में ब्याज दर घटकर केवल 0.10 प्रतिशत रह जाएगी।
वित्तीय विश्लेषण संस्था Canstar की डेटा इनसाइट्स निदेशक Sally Tindall ने कहा कि वेस्टपैक का यह कदम बचत करने वालों के लिए सकारात्मक संकेत है। उन्होंने चेतावनी भी दी कि ग्राहकों को खातों की बारीक शर्तों को समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि बेस रेट बेहद कम है।
वेस्टपैक के बाद ऑस्ट्रेलिया के पाँचवें सबसे बड़े बैंक Macquarie ने भी बचत खातों की ब्याज दरों में वृद्धि की घोषणा की है। मैक्वेरी बैंक के ग्राहक 20 फरवरी से दो मिलियन डॉलर तक की जमा राशि पर 4.50 प्रतिशत वार्षिक ब्याज प्राप्त कर सकेंगे।
इसके अलावा डिजिटल बैंक ING ने अपने लोकप्रिय सेविंग मैक्सिमाइज़र अकाउंट सहित अधिकांश बचत उत्पादों पर ब्याज दर बढ़ाकर 5.00 प्रतिशत कर दी है, जो 10 फरवरी से लागू होगी।
डिजिटल बैंकिंग क्षेत्र में सक्रिय Up Bank ने 11 फरवरी से बचत खातों पर ब्याज दर 4.85 प्रतिशत कर दी है, जबकि UBank और AMP ने 10 फरवरी से 4.60 प्रतिशत ब्याज देने की घोषणा की है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि आरबीए की सख्त मौद्रिक नीति के चलते ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी महंगाई को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया कदम है। इससे जहां एक ओर ऋण लेने वालों पर दबाव बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर बचत करने वालों को कुछ राहत अवश्य मिलेगी।
विशेषज्ञ यह भी सलाह दे रहे हैं कि उपभोक्ताओं को उच्च ब्याज दर के लालच में बिना शर्तों को समझे खाता नहीं खोलना चाहिए, क्योंकि वास्तविक लाभ पूरी तरह मासिक शर्तों के पालन पर निर्भर करता है।