पश्चिम एशिया में अमेरिका–इस्राइल–ईरान के बीच जारी तनाव का असर भारतीय विमानन सेवाओं पर लगातार तीसरे दिन भी दिखाई दिया। क्षेत्र के कई देशों ने एहतियातन अपना हवाई क्षेत्र बंद रखा, जिसके चलते सोमवार को भारतीय एयरलाइनों को कुल 357 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे हजारों यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
विमानन अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, बंगलूरू और चेन्नई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों से आने-जाने वाली 300 से अधिक उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें खाड़ी देशों, यूरोप और उत्तरी अमेरिका के लिए संचालित कई सेवाएं शामिल हैं। एयरलाइनों ने यात्रियों को वैकल्पिक उड़ानों, रिफंड और पुनर्निर्धारण (री-शेड्यूलिंग) की सुविधा देने की घोषणा की है।
दिल्ली एयरपोर्ट पर सबसे अधिक असर
राष्ट्रीय राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 80 से अधिक अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द की गईं। हवाई अड्डे पर यात्रियों की भीड़ देखी गई और कई लोग अपनी उड़ान की स्थिति जानने के लिए एयरलाइन काउंटरों पर पहुंचे। अधिकारियों ने यात्रियों से एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की अद्यतन जानकारी लेने की अपील की है।
मंत्रालय की निगरानी
नागर विमानन मंत्रालय ने स्थिति पर करीबी नजर बनाए रखने की बात कही है। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पश्चिम एशिया में हवाई क्षेत्र बंद होने और वैकल्पिक मार्गों के सीमित विकल्प के कारण उड़ानों के संचालन में कठिनाई आ रही है। सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है और हालात सामान्य होते ही सेवाएं बहाल की जाएंगी।
एयरलाइनों पर आर्थिक दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार उड़ान रद्द होने से एयरलाइनों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। लंबी दूरी की उड़ानों के लिए वैकल्पिक मार्ग अपनाने से उड़ान समय और ईंधन लागत में भी वृद्धि हो रही है।
यात्रियों की बढ़ी चिंता
यात्रियों ने बताया कि अचानक उड़ान रद्द होने से उनकी यात्रा योजनाएं प्रभावित हुई हैं। कई यात्रियों को जरूरी काम या पारिवारिक कारणों से विदेश जाना था, लेकिन अनिश्चितता के कारण उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
उल्लेखनीय है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय उड्डयन क्षेत्र पर व्यापक असर पड़ा है। स्थिति सामान्य होने तक उड़ानों के संचालन में बाधा जारी रहने की आशंका जताई जा रही है।