1929 जैसी महामंदी की चेतावनी: टैरिफ विवाद पर ट्रंप का अदालतों को अल्टीमेटम

1929 जैसी महामंदी की चेतावनी: टैरिफ विवाद पर ट्रंप का अदालतों को अल्टीमेटम

वाशिंगटन, 9 अगस्त 2025 — अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी टैरिफ नीति पर अदालतों के संभावित हस्तक्षेप को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि यदि न्यायालय उनके प्रस्तावित शुल्क कानूनों को रोकते हैं, तो अमेरिका 1929 जैसी महामंदी की चपेट में आ सकता है।

ट्रंप प्रशासन ने हाल के महीनों में आयातित वस्तुओं पर बड़े पैमाने पर शुल्क लगाने की घोषणा की है, जिसमें चीन, यूरोपीय संघ, भारत और अन्य प्रमुख व्यापारिक साझेदार शामिल हैं। राष्ट्रपति का कहना है कि यह कदम अमेरिकी उद्योग और नौकरियों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है, जबकि आलोचकों का मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार में अस्थिरता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ पड़ेगा।

ट्रंप ने अपनी नीति को “अमेरिका फर्स्ट” रणनीति का हिस्सा बताया और संकेत दिया कि वह अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियाँ अधिनियम (IEEPA) का उपयोग करके टैरिफ लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह अधिनियम राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापक आर्थिक कदम उठाने की शक्ति देता है।

अमेरिकी कांग्रेस के कुछ सदस्य और कारोबारी संगठन पहले ही इन टैरिफों को चुनौती देने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटा चुके हैं। उनका तर्क है कि अत्यधिक शुल्क से निर्यात प्रभावित होगा, विदेशी निवेश घटेगा और उपभोक्ताओं को सीधे तौर पर महंगे उत्पादों का सामना करना पड़ेगा।

ट्रंप ने कहा,

“अगर हमने अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए यह कदम नहीं उठाया, तो आने वाले समय में अमेरिका को 1929 की तरह की तबाही झेलनी पड़ सकती है। हमें अपनी फैक्ट्रियों, किसानों और कामगारों को वैश्विक अनुचित व्यापार से बचाना होगा।”

विश्लेषकों का मानना है कि 1930 के दशक में महामंदी को गहराने में उच्च टैरिफ नीतियों की अहम भूमिका थी। इतिहास से मिले इन सबक के बावजूद, ट्रंप का रुख बताता है कि वह घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता देने के लिए किसी भी अंतर्राष्ट्रीय दबाव को नज़रअंदाज़ करने को तैयार हैं।

अब अदालतों के फैसले पर दुनिया की निगाहें टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि अमेरिका मौजूदा वैश्विक व्यापार व्यवस्था के साथ तालमेल बिठाएगा या एक बार फिर संरक्षणवाद की ओर मुड़ेगा।