दक्षिण एशिया में एक नया राजनीतिक समीकरण उभरता दिख रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित वीजा फ्री ट्रैवल डील (Visa-Free Travel Deal) ने भारत की खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। दोनों देशों के बीच यह प्रस्ताव फिलहाल शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके संकेत गंभीर रणनीतिक परिणामों की ओर इशारा करते हैं।
हालांकि इस डील को क्षेत्रीय सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक कदम के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, लेकिन भारत के सुरक्षा विशेषज्ञ इसे 'सॉफ्ट बॉर्डर खतरा' के रूप में देख रहे हैं।
1971 में पाकिस्तान के दमनकारी शासन के खिलाफ बांग्लादेश का उदय भारत की मदद से हुआ था। उस समय लाखों लोग पाकिस्तान की बर्बरता से जान बचाकर भारत आए थे। भारत ने न सिर्फ बांग्लादेश की स्वतंत्रता में निर्णायक भूमिका निभाई, बल्कि उसके पुनर्निर्माण में भी सहयोग दिया।
लेकिन बीते वर्षों में बांग्लादेश की विदेश नीति में बड़ा झुकाव चीन और पाकिस्तान की ओर देखने को मिला है, जिसने भारत को चौकन्ना कर दिया है।
दोनों देशों के नागरिकों को एक-दूसरे के देश में वीजा के बिना यात्रा की अनुमति मिल सकती है।
उद्देश्य बताया गया है — व्यापार, धार्मिक पर्यटन और सांस्कृतिक संपर्क को बढ़ावा देना।
प्रस्तावित डील में आसान एंट्री पॉइंट्स और न्यूनतम डाक्यूमेंटेशन की बात हो रही है।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI लंबे समय से बांग्लादेश के कट्टरपंथी गुटों के जरिए भारत में घुसपैठ कराती रही है। अब वीजा-मुक्त प्रणाली ऐसे तत्वों के लिए सीमा पार करना बेहद आसान बना सकती है।
बांग्लादेश पहले से ही अवैध अप्रवासियों की समस्या को लेकर भारत के लिए चिंता का विषय रहा है। अब अगर पाकिस्तान के नागरिक भी इसी रास्ते से भारत में प्रवेश करने लगें, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है।
बांग्लादेश से सटे असम, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम जैसे राज्यों में पहले से ही घुसपैठ, उग्रवाद और सीमा-विवाद जैसी समस्याएं हैं। अब वीजा-फ्री व्यवस्था वहां सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बन सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार यह डील चीन की दक्षिण एशिया में “String of Pearls” रणनीति का हिस्सा हो सकती है। चीन पहले ही पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट और बांग्लादेश के पायरा पोर्ट जैसे स्थानों में निवेश कर चुका है। उसका उद्देश्य भारत को चारों ओर से घेरना है — सैन्य, आर्थिक और कूटनीतिक रूप से।
“यह समझौता सिर्फ ट्रैवल सुविधा नहीं है, यह एक रणनीतिक तंत्र हो सकता है जिसके जरिए पाकिस्तान भारत की पूर्वी सीमाओं पर सक्रिय हो सकता है। हमें बहुत सतर्क रहना होगा।”
“बांग्लादेश को यह समझना होगा कि पाकिस्तान के साथ ज्यादा नजदीकी उसके स्वतंत्र राष्ट्र बनने के इतिहास और उस संघर्ष की भावना के खिलाफ है।”
🇮🇳 राजनयिक स्तर पर विरोध: भारत को बांग्लादेश के साथ सीधा संवाद कर यह बताना चाहिए कि ऐसी डील से द्विपक्षीय विश्वास को चोट पहुंच सकती है।
🛰️ सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना: हाई-टेक सर्विलांस, BSF की गश्त और खुफिया नेटवर्क को दोगुना किया जाना चाहिए।
📡 इंटेलिजेंस साझेदारी बढ़ाना: म्यांमार और नेपाल जैसे पड़ोसियों के साथ इंटेलिजेंस शेयरिंग को सक्रिय किया जाना चाहिए।