हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें मेलबर्न स्थित सेंट पैट्रिक कैथेड्रल के बाहर सैकड़ों मुस्लिम पुरुषों की भीड़ दिखाई दे रही है। इस वीडियो को अब तक लाखों लोग देख चुके हैं और इसे लेकर सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ दावे किए जा रहे हैं।
यह वीडियो 7 जुलाई को रिकॉर्ड किया गया था, जब मेलबर्न में मुस्लिम समुदाय द्वारा एक धार्मिक आयोजन आयोजित किया गया था। लेकिन इस वीडियो को “युद्ध की तैयारी”, “डराने की साजिश”, और “धार्मिक प्रभुत्व का प्रदर्शन” जैसे भ्रामक बयानों के साथ शेयर किया जा रहा है।
ब्रिटेन के विवादित इस्लाम-विरोधी कार्यकर्ता टॉमी रॉबिन्सन ने इस वीडियो को “मेलबर्न कैथेड्रल के चारों ओर मुसलमानों की पागलपन भरी भीड़” के रूप में पेश किया। इस पोस्ट को लगभग 20 लाख बार देखा जा चुका है और इस पर हजारों नफरत भरे कमेंट्स भी आए हैं।
ऑस्ट्रेलिया की राजनीति से जुड़ी पूर्व उम्मीदवार कैथरीन डेव्स ने इसे “डराने और प्रभुत्व दिखाने का प्रयास” बताया। वहीं, विक्टोरिया के पूर्व लिबरल नेता बर्नी फिन ने भी इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखा, “यह तो बहुत अजीब है, हजारों मुसलमानों ने मेलबर्न के कैथेड्रल को घेर लिया।”
असलियत क्या है?
दरअसल, यह सभा मेलबर्न के एक सार्वजनिक स्थान पर आयोजित ईद मिलाद-उन-नबी से जुड़ा एक शांतिपूर्ण धार्मिक आयोजन था, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग एकत्रित हुए थे। यह आयोजन किसी भी धार्मिक स्थल को निशाना बनाकर नहीं किया गया था, और न ही इसमें कोई हिंसक या आपत्तिजनक गतिविधि देखी गई।
सेंट पैट्रिक कैथेड्रल उस क्षेत्र के पास स्थित है जहां यह धार्मिक कार्यक्रम हुआ, लेकिन मुस्लिम समुदाय द्वारा चर्च को किसी भी रूप में घेरने या विरोध की भावना से जाने की बात पूरी तरह गलत है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
स्थानीय पुलिस और मेलबर्न प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह आयोजन शांतिपूर्ण था और किसी भी प्रकार के टकराव या अशांति की कोई रिपोर्ट नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के वीडियो को बिना संदर्भ के शेयर करना सामाजिक सौहार्द्र को नुकसान पहुंचा सकता है।