कराकास। वेनेजुएला में जारी गहरे राजनीतिक संकट के बीच देश के सुप्रीम कोर्ट ने उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करने का आदेश दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के पद पर बने रहने को लेकर गंभीर संवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय विवाद उत्पन्न हो गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में शासन-प्रशासन की निरंतरता बनाए रखना आवश्यक है। संविधान के प्रावधानों के तहत उपराष्ट्रपति को अस्थायी रूप से राष्ट्रपति की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, ताकि देश में प्रशासनिक शून्यता न पैदा हो।
वेनेजुएला सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति पद से जुड़े हालात “असाधारण” हैं। कोर्ट के अनुसार, जब राष्ट्रपति अपने दायित्वों का निर्वहन करने की स्थिति में नहीं होते, तब उपराष्ट्रपति को अंतरिम राष्ट्रपति नियुक्त करना संवैधानिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यह व्यवस्था अस्थायी है और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया—चाहे वह चुनाव हो या किसी अन्य संवैधानिक समाधान—कानून के अनुसार तय की जाएगी।
डेल्सी रोड्रिग्ज वेनेजुएला की प्रभावशाली राजनेताओं में गिनी जाती हैं। वे वर्ष 2018 से उपराष्ट्रपति पद पर हैं और इससे पहले विदेश मंत्री तथा सूचना एवं संचार मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद संभाल चुकी हैं। उन्हें राष्ट्रपति मादुरो की करीबी और भरोसेमंद सहयोगी माना जाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, रोड्रिग्ज का अंतरिम राष्ट्रपति बनना सत्ता संरचना में निरंतरता का संकेत है, न कि किसी तात्कालिक वैचारिक बदलाव का।
इस फैसले के बाद वेनेजुएला में राजनीतिक माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया है। राजधानी कराकास सहित कई शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। विपक्षी दलों ने इस निर्णय पर सवाल उठाते हुए इसे “सत्ताधारी दल को बचाने का प्रयास” बताया है, जबकि सरकार समर्थकों ने इसे संविधानसम्मत कदम करार दिया है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस घटनाक्रम को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं। कुछ देशों ने वेनेजुएला में शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक समाधान की अपील की है, जबकि अन्य देशों ने घटनाओं पर कड़ी नजर रखने की बात कही है। संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय संगठनों की ओर से भी स्थिति पर चिंता जताई गई है।