सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया के अनुभवी बल्लेबाज़ उस्मान ख्वाजा ने शुक्रवार को एक भावुक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान टेस्ट क्रिकेट से अपने संन्यास की अचानक घोषणा कर दी। 39 वर्षीय ख्वाजा ने बताया कि सिडनी में खेले जा रहे अंतिम एशेज टेस्ट के बाद वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कह देंगे।
सिडनी क्रिकेट ग्राउंड (SCG) में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान ख्वाजा कई बार भावुक नज़र आए, खासकर जब उन्होंने अपने परिवार और पत्नी रैचेल के योगदान को याद किया। गुरुवार से ही उनके संन्यास को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, जिन पर अब विराम लग गया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ख्वाजा ने हाल के महीनों में पूर्व खिलाड़ियों और मीडिया से मिली आलोचनाओं पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि बार-बार उनके संन्यास को लेकर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाए जाना उन्हें व्यक्तिगत हमले जैसा महसूस हुआ।
ख्वाजा ने बताया कि ऑस्ट्रेलियाई टीम के मुख्य कोच एंड्रयू मैकडोनाल्ड ने उनसे कई मौकों पर खेल जारी रखने का आग्रह किया था, यहां तक कि भारत दौरे 2027 तक खेलने की भी इच्छा जताई गई थी। इसके बावजूद मीडिया में उन्हें “स्वार्थी” करार दिया गया, जिससे वह आहत हुए।
“लोग कहते थे कि मैं अपने लिए खेल रहा हूं, जबकि सच्चाई यह थी कि मैं टीम और कोच की इच्छा पर मैदान में था,” ख्वाजा ने कहा।
प्रेस वार्ता का सबसे भावुक क्षण तब आया जब ख्वाजा ने अपने बचपन और संघर्षों की चर्चा की। पाकिस्तान में जन्मे ख्वाजा ऑस्ट्रेलिया के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले पहले ऐसे खिलाड़ी हैं जिनका जन्म पाकिस्तान में हुआ और जो मुस्लिम समुदाय से आते हैं।
उन्होंने कहा,
“मैं उम्मीद करता हूं कि मेरी कहानी उन बच्चों को प्रेरित करेगी जो खुद को अलग महसूस करते हैं, जिन्हें कहा जाता है कि वे कभी सफल नहीं हो सकते। मैंने भी यह सब झेला है, लेकिन आज मैं इस मंच पर खड़ा हूं। अगर आप चाहें, तो कुछ भी संभव है।”
प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में ख्वाजा ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में कहा कि संन्यास के बाद वह गोल्फ खेलने में अधिक समय बिताएंगे, जिस पर मौजूद पत्रकारों और दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान दिखाई दी।
उस्मान ख्वाजा का करियर न केवल आंकड़ों के लिहाज़ से, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व और प्रेरणा के रूप में भी ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट इतिहास में विशेष स्थान रखेगा।