मेलबर्न यूनिवर्सिटी का नया कैंपस बना विवाद का केंद्र, छात्रों और शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश

मेलबर्न यूनिवर्सिटी का नया कैंपस बना विवाद का केंद्र, छात्रों और शिक्षकों में जबरदस्त आक्रोश

मेलबर्न यूनिवर्सिटी, जो अक्सर विश्व की शीर्ष शिक्षण संस्थानों में गिनी जाती है, इन दिनों अपने नए $2 बिलियन (करीब 13 हजार करोड़ रुपये) के कैंपस प्रोजेक्ट को लेकर विवादों में घिर गई है। यह कैंपस पोर्ट मेलबर्न के फिशरमैन्स बेंड इलाके में बनाया जा रहा है — जहां कभी जनरल मोटर्स होल्डन की फैक्ट्री हुआ करती थी। लेकिन इस भव्य परियोजना को लेकर छात्रों और शिक्षकों में तीखा गुस्सा है।

क्यों भड़के छात्र और शिक्षक?

छात्रों का आरोप है कि यह नया कैंपस दरअसल "हथियार उद्योग का अड्डा" बनने जा रहा है। यूनिवर्सिटी इस कैंपस में दुनिया की बड़ी हथियार बनाने वाली कंपनियों — BAE Systems, Boeing और Lockheed Martin — के साथ मिलकर रिसर्च और डेवलपमेंट करेगी। इन कंपनियों पर आरोप है कि वे ऐसे हथियार बनाती हैं जो युद्धग्रस्त इलाकों, खासकर गाजा में, नागरिकों के खिलाफ इस्तेमाल हो रहे हैं।

छात्रा और "Students for Palestine" संगठन की संयोजक बेला बैराघी ने कहा, “हम अपने कैंपस से इन युद्ध मुनाफाखोरों को बाहर करना चाहते हैं। यूनिवर्सिटी ने खुद कहा है कि वह डिफेंस सेक्टर के साथ ‘अभूतपूर्व साझेदारी’ करेगी। इसका सीधा मतलब है कि हमारा शिक्षा संस्थान अब बम बनाने वालों की सेवा में लग जाएगा।”

नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर ने भी जताई नाराजगी

यूनिवर्सिटी से लंबे समय तक जुड़े रहे और 2017 में नोबेल शांति पुरस्कार जीतने वाली मुहिम के सदस्य प्रो. टिलमैन रफ ने इस साझेदारी की आलोचना करते हुए कहा, “यह अकादमिक वेश्यावृत्ति है। एक ओर यूनिवर्सिटी समाज सेवा और मानवता की बात करती है, दूसरी ओर युद्ध के सौदागरों से हाथ मिलाती है।”

क्या कहती है यूनिवर्सिटी?

यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह कैंपस "ऑस्ट्रेलिया की संप्रभु रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के राष्ट्रीय प्रयास" का हिस्सा है। यूनिवर्सिटी के अनुसार, इस कैंपस में छात्रों को आधुनिक तकनीक, रिसर्च, टेस्टिंग सुविधाएं और इंडस्ट्री इंटर्नशिप के मौके मिलेंगे।

लेकिन छात्रों का कहना है...

बेला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो में कहा, “यह ऐसा है जैसे हमारी यूनिवर्सिटी ‘ब्रेन बिहाइंड द बम्स’ बनना चाहती है। ये कंपनियां वही हैं जो गाजा और लेबनान में रिफ्यूजी कैंपों पर हमलों में शामिल हथियार बनाती हैं।"

उन्होंने कहा कि BAE Systems के बनाए M-109 Howitzer और Boeing के Apache हेलिकॉप्टर्स का इस्तेमाल इजराइली सेना द्वारा गाजा में किया गया है।