आवास संकट पर यूनियनों का सरकार के खिलाफ़ हमला तेज़, CGT और नेगेटिव गियरिंग में सुधार की मांग

आवास संकट पर यूनियनों का सरकार के खिलाफ़ हमला तेज़, CGT और नेगेटिव गियरिंग में सुधार की मांग

ऑस्ट्रेलिया में गहराते आवास संकट को लेकर ट्रेड यूनियनों ने केंद्र सरकार पर दबाव और तेज़ कर दिया है। ऑस्ट्रेलियन काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन्स (ACTU) ने सरकार से पूंजीगत लाभ कर (कैपिटल गेंस टैक्स – CGT) में दी जा रही छूट को कम करने और नेगेटिव गियरिंग व्यवस्था को सीमित करने की मांग की है। यूनियनों का कहना है कि मौजूदा कर नीतियाँ आवास बाज़ार में असंतुलन पैदा कर रही हैं और आम लोगों के लिए घर खरीदना दिन-ब-दिन मुश्किल होता जा रहा है।

ACTU द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में एक औसत ऑस्ट्रेलियाई नागरिक को बिना कर्ज़ लिए घर खरीदने के लिए अपनी वार्षिक आय का लगभग 11 गुना खर्च करना पड़ता है। यूनियन का दावा है कि यह स्थिति दशकों में सबसे खराब है और इसका सीधा असर युवा परिवारों, पहली बार घर खरीदने वालों और निम्न व मध्यम आय वर्ग पर पड़ रहा है।

यूनियनों ने आरोप लगाया है कि नेगेटिव गियरिंग और CGT में दी जाने वाली छूट का सबसे अधिक लाभ बड़े निवेशकों को मिल रहा है। इससे संपत्ति में सट्टेबाज़ी को बढ़ावा मिल रहा है और घरों की कीमतें आम जनता की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। ACTU का कहना है कि निवेशकों को मिल रही कर रियायतों के कारण मकान किराए पर देने के बजाय मुनाफ़े के लिए खरीदे जा रहे हैं, जिससे आवास की वास्तविक उपलब्धता घट रही है।

ACTU ने सरकार से मांग की है कि CGT डिस्काउंट में कटौती की जाए और नेगेटिव गियरिंग को केवल नए घरों तक सीमित किया जाए, ताकि नए निर्माण को बढ़ावा मिले और बाज़ार में मकानों की आपूर्ति बढ़ सके। यूनियन नेताओं का मानना है कि इससे न केवल घरों की कीमतों पर दबाव कम होगा, बल्कि किरायेदारों को भी राहत मिलेगी।

यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए, तो आवास संकट और गंभीर रूप ले सकता है। बढ़ते किराए, सीमित आवास विकल्प और लगातार ऊपर जाती संपत्ति कीमतें सामाजिक असमानता को और बढ़ा सकती हैं।

हालांकि सरकार की ओर से इन मांगों पर अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि आवास सुधार आने वाले समय में एक बड़ा नीतिगत और चुनावी मुद्दा बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर सुधारों के बिना आवास संकट से निपटना कठिन होगा।