नई दिल्ली। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट पेश करेंगी। देश की अर्थव्यवस्था, मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति, किसानों की आय और निवेश को लेकर यह बजट बेहद अहम माना जा रहा है। आम लोगों से लेकर उद्योग जगत तक की निगाहें इस बजट पर टिकी हैं।
सूत्रों और बजट पूर्व चर्चाओं के मुताबिक, इस बार सरकार का फोकस टैक्स राहत, सामाजिक सुरक्षा, निवेश प्रोत्साहन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने पर रह सकता है। माना जा रहा है कि वित्त मंत्री कई ऐसे ऐलान कर सकती हैं, जिनका सीधा असर आम आदमी की जेब और देश की आर्थिक रफ्तार पर पड़ेगा।
बजट से सबसे ज्यादा उम्मीदें मध्यम वर्ग को हैं। नए टैक्स रेजीम के तहत टैक्स-फ्री आय सीमा बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठ रही है। संभावना है कि सरकार आयकर स्लैब में बदलाव कर टैक्स बोझ कम करने का प्रयास करे। इसके साथ ही पुराने टैक्स रेजीम में भी कुछ राहत दिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है।
वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज आय पर टीडीएस की सीमा बढ़ाने, स्वास्थ्य खर्चों में टैक्स छूट और पेंशन से जुड़ी सहूलियतें बढ़ाई जा सकती हैं। वहीं वेतनभोगी वर्ग के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी की भी चर्चा है।
रिटायरमेंट प्लानिंग को प्रोत्साहित करने के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में अतिरिक्त टैक्स छूट या निकासी नियमों में नरमी संभव है। साथ ही जीवन और स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर टैक्स लाभ बढ़ाकर आम लोगों को बीमा सुरक्षा से जोड़ने की कोशिश की जा सकती है।
सर्राफा बाजार की निगाहें भी बजट पर हैं। सोना-चांदी पर आयात शुल्क या जीएसटी में संशोधन हो सकता है, जिससे आभूषण उद्योग को राहत मिले। शेयर बाजार के निवेशक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन टैक्स और अन्य कर प्रावधानों में सरलता की उम्मीद कर रहे हैं।
जीएसटी व्यवस्था को और सरल बनाने के लिए कुछ दरों में बदलाव और अनुपालन प्रक्रिया आसान की जा सकती है। खासकर छोटे कारोबारियों और एमएसएमई सेक्टर को राहत देने के उपाय संभव हैं।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए किसानों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने, कृषि ऋण सस्ता करने और फसल बीमा योजनाओं को मजबूत करने जैसे कदमों की उम्मीद जताई जा रही है।
यह बजट ऐसे समय आ रहा है, जब वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारत की विकास दर को बनाए रखना सरकार की प्राथमिकता है। रोजगार सृजन, बुनियादी ढांचे में निवेश और सामाजिक कल्याण योजनाओं के लिए बजट आवंटन बढ़ाया जा सकता है।
कुल मिलाकर, आज पेश होने वाला आम बजट आम आदमी की जेब, किसान की आय और देश की आर्थिक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।