मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने गुआम में तैनात किए B-2 बमवर्षक विमान

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने गुआम में तैनात किए B-2 बमवर्षक विमान

वॉशिंगटन, 21 जून:
ईरान-इज़राइल संघर्ष के बीच अमेरिका ने गुआम द्वीप पर अत्याधुनिक B-2 बमवर्षक विमान तैनात किए हैं। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप यह विचार कर रहे हैं कि अमेरिका को इस संघर्ष में इज़राइल के पक्ष में उतरना चाहिए या नहीं।

हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि इन बमवर्षकों की तैनाती सीधे तौर पर ईरान-इज़राइल युद्ध से जुड़ी है या नहीं। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि B-2 विमान अमेरिका के सबसे घातक हथियार, 30,000 पौंड वजनी GBU-57 'मैसिव ऑर्डनेंस पेनिट्रेटर' से लैस किए जा सकते हैं, जो गहरे भूमिगत ठिकानों को भी नष्ट करने में सक्षम है। यह बम खासतौर पर ईरान के फोर्दो जैसे न्यूक्लियर अड्डों को निशाना बनाने के लिए बनाया गया है।

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) ने इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि गुआम से आगे और किसी स्थान पर इन विमानों को भेजने के आदेश अभी तक नहीं दिए गए हैं।

विशेषज्ञों की नजर अब हिंद महासागर स्थित अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे 'डिएगो गार्सिया' की ओर है, जहां से मध्य पूर्व में इन बमवर्षकों को तैनात करना रणनीतिक रूप से अधिक प्रभावी माना जाता है। उल्लेखनीय है कि पिछले महीने तक डिएगो गार्सिया में B-2 तैनात थे, जिन्हें बाद में B-52 से बदल दिया गया था।

इस बीच, इज़राइल ने शनिवार को घोषणा की कि उसके हमलों में एक वरिष्ठ ईरानी कमांडर मारा गया है। वहीं ईरान ने कहा है कि वह अपने परमाणु कार्यक्रम पर किसी भी दबाव में आकर कोई वार्ता नहीं करेगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका को इस संघर्ष में शामिल होना है या नहीं, इसका निर्णय वह अगले दो हफ्तों में करेंगे। उनका कहना है कि यह देखना जरूरी है कि “क्या लोग समझदारी से काम लेते हैं या नहीं।”

इस सप्ताह की शुरुआत में ही रॉयटर्स ने रिपोर्ट दी थी कि अमेरिका ने यूरोप और मध्य पूर्व में बड़ी संख्या में टैंकर विमानों और लड़ाकू विमानों की तैनाती शुरू कर दी है। साथ ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र से एक अमेरिकी विमानवाहक पोत को भी मध्य पूर्व भेजा जा रहा है।

यह घटनाक्रम वैश्विक सुरक्षा स्थिति को और अधिक गंभीर बना सकता है, खासकर तब जब ईरान और इज़राइल के बीच युद्ध गहराता जा रहा है।