अमेरिका ने पूछा – युद्ध की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया परमाणु पनडुब्बियों का कैसे करेगा उपयोग?

अमेरिका ने पूछा – युद्ध की स्थिति में ऑस्ट्रेलिया परमाणु पनडुब्बियों का कैसे करेगा उपयोग?

अमेरिका ने AUKUS समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को मिलने वाली परमाणु पनडुब्बियों के इस्तेमाल को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) जानना चाहता है कि अगर अमेरिका युद्ध में उतरता है – खासकर चीन या किसी अन्य शक्ति के खिलाफ – तो ऑस्ट्रेलिया उन पनडुब्बियों का किस प्रकार और किन परिस्थितियों में उपयोग करेगा।

इस मुद्दे को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी एल्बनीज़ के बीच बातचीत होने की संभावना है। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का कहना है कि वे चाहते हैं कि ऑस्ट्रेलिया अपनी सैन्य भूमिका को और स्पष्ट करे और यह बताए कि वह अमेरिका के साथ मिलकर रणनीतिक सैन्य अभियानों में कैसे भाग लेगा।

पेंटागन AUKUS समझौते की समीक्षा भी कर रहा है, जो कुल 368 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का है। इस समीक्षा के दौरान अमेरिका ने ऑस्ट्रेलिया से अपनी रक्षा बजट में “काफी वृद्धि” करने की मांग की है। अमेरिका चाहता है कि ऑस्ट्रेलिया इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने में और अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।

AUKUS समझौता क्या है?
AUKUS एक त्रिपक्षीय सैन्य समझौता है, जिसमें अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं। इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को अत्याधुनिक परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां मिलनी हैं, जिससे वह क्षेत्रीय सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा सके।

हालांकि, आलोचक यह सवाल भी उठा रहे हैं कि क्या ऑस्ट्रेलिया को अमेरिकी नीतियों का अंधानुकरण करना चाहिए या उसे अपनी स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखनी चाहिए।

विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में AUKUS समझौता केवल तकनीकी सहयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक बड़ी भू-राजनीतिक साझेदारी का रूप ले सकता है – जिसमें युद्ध जैसी स्थितियों में सहयोग की स्पष्ट परिभाषा अहम होगी।

 
 
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