प्रदेश सरकार ने रविवार को अधिसूचना जारी करते हुए उन वस्तुओं की सूची सार्वजनिक कर दी है जिन पर अब कोई जीएसटी (GST) लागू नहीं होगा। नई दरें 22 सितम्बर से पूरे देश में लागू होंगी। यह कदम गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी बुनियादी वस्तुओं को करमुक्त कर दिया गया है ताकि आमजन के जीवन पर महंगाई का बोझ कम हो। इसके अलावा, सरकार ने निगरानी के लिए मंत्रियों और सांसदों को बाजारों और मंडियों में औचक निरीक्षण का निर्देश भी दिया है।
जारी अधिसूचना के मुताबिक निम्नलिखित वस्तुओं को शून्य जीएसटी के दायरे में रखा गया है:
अनाज और दालें – गेहूं, चावल व दालें (बिना पैकिंग और बिना ब्रांड वाले)
फल और सब्जियां – कच्चे और प्राकृतिक रूप से बिकने वाले ताजे उत्पाद
दूध – बिना पैकेट और बिना प्रोसेसिंग वाला दूध
अंडे और मीट – सीधे बिकने वाले, बिना किसी प्रोसेसिंग के
शिक्षण सामग्री – स्कूल-कॉलेज की किताबें और नोटबुक
खाद्य नमक – पूरी तरह से शून्य कर श्रेणी में
हैंडमेड उत्पाद – टोकरी, रस्सी और पारंपरिक कुटीर उद्योग से जुड़े सामान
धार्मिक स्थलों—मंदिरों, मस्जिदों, चर्चों, गुरुद्वारों और दरगाहों—द्वारा वितरित प्रसाद को भी शून्य जीएसटी सूची में शामिल किया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से गरीब और निम्न-मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को सीधा फायदा होगा। अगर इन वस्तुओं को टैक्स के दायरे में लाया जाता तो महंगाई और बढ़ती। लेकिन सरकार ने छूट देकर आमजन की जेब पर बोझ घटाया है।
छात्रों और अभिभावकों को किताबें और नोटबुक पर करमुक्ति से राहत मिलेगी।
किसानों को भी परोक्ष लाभ होगा क्योंकि उनके उत्पाद बिना टैक्स सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे।
कुटीर उद्योग और हस्तशिल्प उत्पादों को टैक्स छूट से बाज़ार में टिके रहने में मदद मिलेगी।
सूत्रों के अनुसार, नई व्यवस्था का पालन सुनिश्चित कराने के लिए मंत्री और सांसद औचक निरीक्षण करेंगे। बाजार समितियों और खुदरा व्यापारियों पर नजर रखी जाएगी ताकि कोई व्यापारी टैक्स के नाम पर उपभोक्ताओं से अतिरिक्त राशि न वसूल सके।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह कदम सरकार की ‘जनहित और उपभोक्ता हितैषी नीति’ का हिस्सा है। शून्य जीएसटी वाली सूची का स्पष्ट संदेश है कि बुनियादी उपभोक्ता वस्तुओं पर कर का बोझ जनता पर नहीं डाला जाएगा।