लखनऊ।
प्रदेश सरकार ने शिक्षा जगत से जुड़े लाखों कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कैशलेस इलाज की सुविधा का दायरा बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह फैसला लिया गया कि अब बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभाग से जुड़े शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मचारी और उनके आश्रित सरकारी के साथ-साथ सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में भी कैशलेस इलाज करा सकेंगे।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बीते वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर इस योजना की घोषणा की थी, जिस पर अब कैबिनेट की औपचारिक मंजूरी मिल गई है। इस निर्णय से प्रदेश के लगभग 15 लाख शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मी लाभान्वित होंगे। योजना पर सरकार द्वारा करीब 448 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय वहन किया जाएगा।
वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कैबिनेट बैठक के बाद आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि बैठक में कुल 32 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें से 30 को स्वीकृति दी गई।
माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने बताया कि इस फैसले के तहत अनुदानित, स्ववित्तपोषित एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षणेत्तर कर्मी, मानदेय शिक्षक, व्यावसायिक शिक्षा के विषय विशेषज्ञ तथा संस्कृत शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त विद्यालयों के कर्मचारी कैशलेस आईपीडी (अंत:रोगी) इलाज की सुविधा का लाभ उठा सकेंगे।
इस श्रेणी में लगभग 2.97 लाख लोग शामिल हैं, जिन पर 89.25 करोड़ रुपये का अनुमानित खर्च आएगा।
बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने बताया कि इस योजना का लाभ बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों और परिषद से मान्यता प्राप्त अनुदानित व स्ववित्तपोषित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक, शिक्षामित्र, विशेष शिक्षक, अनुदेशक, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के वार्डेन, पूर्णकालिक-अंशकालिक शिक्षक तथा प्रधानमंत्री पोषण योजना के रसोइयों को भी मिलेगा।
इस वर्ग में 11.95 लाख से अधिक कर्मचारी शामिल हैं। प्रति कर्मी लगभग 3000 रुपये वार्षिक प्रीमियम के हिसाब से सरकार पर 358.61 करोड़ रुपये का वार्षिक व्यय आएगा।
कैशलेस इलाज की सुविधा सरकारी अस्पतालों के साथ-साथ साचीज (SACHIS) से जुड़े निजी अस्पतालों में भी उपलब्ध होगी। इलाज की दरें प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत जन आरोग्य योजना और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानकों के अनुसार तय की जाएंगी।
स्ववित्तपोषित विद्यालयों के शिक्षकों को योजना का लाभ वेरिफिकेशन के बाद दिया जाएगा। इसके लिए प्रत्येक जनपद में जिला विद्यालय निरीक्षक और बेसिक शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में समिति गठित की जाएगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जो शिक्षक या कर्मचारी पहले से केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य स्वास्थ्य योजना, प्रधानमंत्री आयुष्मान जन आरोग्य योजना या मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के अंतर्गत आच्छादित हैं, उन्हें इस योजना का अतिरिक्त लाभ नहीं मिलेगा।