नई दिल्ली, 12 फरवरी। संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद-रोधी निगरानी टीम की ताज़ा रिपोर्ट में 9 नवंबर को नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किला के पास हुए धमाके को लेकर चौंकाने वाला खुलासा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, एक सदस्य देश ने जानकारी दी है कि पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने इस हमले सहित कई अन्य हमलों की जिम्मेदारी ली है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि लाल किले के पास हुए इस हमले में 15 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना ने देश की सुरक्षा व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के खतरे को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
संयुक्त राष्ट्र की निगरानी टीम ने अपनी रिपोर्ट में इस बात पर भी चिंता जताई है कि आतंकी संगठन लगातार अपनी रणनीतियों में बदलाव कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर को ‘जमात-उल-मुमिनात’ नाम से एक महिला शाखा के गठन की घोषणा की।
बताया गया है कि इस महिला विंग का उद्देश्य आतंकी गतिविधियों को सहयोग और समर्थन देना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम संगठन की भर्ती और नेटवर्क विस्तार की नई रणनीति का हिस्सा हो सकता है।
हालांकि रिपोर्ट में सीधे तौर पर किसी देश का नाम नहीं लिया गया है, लेकिन जैश-ए-मोहम्मद का पाकिस्तान से जुड़ाव पहले भी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठता रहा है। विभिन्न सदस्य देशों के बीच संगठन की सक्रियता को लेकर मतभेद भी सामने आए हैं।
कुछ देशों का मानना है कि यह संगठन अभी भी सक्रिय और खतरनाक है, जबकि एक अन्य सदस्य देश ने इसे निष्क्रिय बताया है। यूएन ने इन विरोधाभासी आकलनों को दक्षिण एशिया में आतंकवाद-रोधी प्रयासों के लिए चुनौतीपूर्ण बताया है।
यूएन की रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि भले ही कुछ आतंकी संगठन कमजोर पड़े हों, लेकिन उनकी खुद को पुनर्गठित करने और उच्च-प्रोफाइल लक्ष्यों पर हमला करने की क्षमता अभी भी बनी हुई है।
निगरानी दल ने चेतावनी दी है कि निरंतर दबाव के बावजूद ऐसे संगठन नए भर्ती मॉडल, प्रतीकात्मक हमलों और प्रचार रणनीतियों के माध्यम से अपनी मौजूदगी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
लाल किले हमले के बाद भारतीय जांच एजेंसियों ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। सूत्रों के अनुसार, संदिग्धों की तलाश तेज कर दी गई है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय भी बढ़ाया गया है।
इस बीच, यूएन की रिपोर्ट ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एकजुट और सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय शांति को सुरक्षित रखा जा सके।