ट्रम्प के टैरिफ, बढ़ती महंगाई और पार्टी में अंदरूनी बगावत: जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के इस्तीफे की पूरी कहानी

ट्रम्प के टैरिफ, बढ़ती महंगाई और पार्टी में अंदरूनी बगावत: जापान के प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के इस्तीफे की पूरी कहानी

टोक्यो, 7 सितंबर 2025।
जापान की राजनीति आज एक बड़े मोड़ पर पहुँच गई जब प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा ने अचानक पद से इस्तीफे की घोषणा कर दी। यह फैसला ऐसे समय आया है जब देश पहले से ही आर्थिक दबाव, महंगाई और अमेरिकी टैरिफ संकट से जूझ रहा था। उनके कदम ने न सिर्फ जापानी जनता को चौंकाया, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में राजनीतिक समीकरणों को भी हिला दिया है।


चुनावी हार और पार्टी का दबाव

जुलाई 2025 में हुए ऊपरी सदन (हाउस ऑफ काउंसिलर्स) के चुनाव में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद पार्टी ने दोनों सदनों में अपना बहुमत खो दिया, जिससे सरकार की नीतिगत स्थिति कमजोर हो गई।

पार्टी के भीतर असंतोष तेजी से बढ़ा। कई वरिष्ठ नेताओं—जैसे कृषि मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी और पूर्व प्रधानमंत्री योशिहिदे सुगा—ने इशिबा को संकेत दिया कि जनता का भरोसा लौटाने के लिए उन्हें पद छोड़ना चाहिए। वहीं टारो असो जैसे पुराने और प्रभावशाली नेता खुलकर इस्तीफे की मांग करने लगे। इन हालातों में इशिबा ने पार्टी को टूटने से बचाने के लिए इस्तीफे को ही अंतिम रास्ता चुना।


ट्रम्प से समझौता और टैरिफ का बोझ

प्रधानमंत्री रहते हुए इशिबा की सबसे बड़ी चुनौती अमेरिका के साथ व्यापारिक तनाव रही। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने जापानी निर्यात पर 25% तक टैरिफ लगा दिया था, जिसने जापान की अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव डाला।

लंबी बातचीत के बाद इशिबा ने एक समझौता किया, जिसके तहत यह टैरिफ घटाकर 15% कर दिया गया। साथ ही जापान ने अमेरिका में बड़े पैमाने पर निवेश का वादा भी किया। इशिबा ने इसे अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाया, लेकिन घरेलू स्तर पर आलोचकों का कहना था कि यह सौदा जापान की कमजोर स्थिति का प्रमाण है।


बढ़ती महंगाई और आर्थिक संकट

टैरिफ विवाद और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अस्थिरता के चलते जापान में महंगाई लगातार बढ़ रही थी। खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतें आम लोगों के बजट पर सीधा असर डाल रही थीं।

विश्लेषकों का मानना है कि इशिबा के इस्तीफे से बाजार में अनिश्चितता और बढ़ सकती है। जापानी सरकारी बॉन्ड्स (JGBs) में उतार-चढ़ाव की आशंका है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि उनके उत्तराधिकारी अधिक खर्च-प्रधान नीतियाँ अपनाते हैं तो अर्थव्यवस्था को अल्पकालिक राहत मिल सकती है।


आंतरिक कलह और विभाजन का डर

इशिबा की सबसे बड़ी चिंता पार्टी में संभावित विभाजन थी। अगर वे पद पर बने रहते, तो विरोधी धड़े नेतृत्व बदलने के लिए खुलकर बगावत कर सकते थे। इस्तीफा देकर उन्होंने यह संकेत दिया कि वे व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा से अधिक पार्टी की एकता को प्राथमिकता देते हैं।

उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि “मेरे इस्तीफे से पार्टी में स्थिरता लौटेगी और देश के हितों की रक्षा होगी।”


आगे की राह: नया नेतृत्व और चुनौतियाँ

अब सबकी निगाहें LDP के नए नेतृत्व चुनाव पर टिकी हैं, जो अक्टूबर की शुरुआत में होने की संभावना है। संभावित उम्मीदवारों में सना ए टाकाइची और शिंजीरो कोइज़ुमी के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं।

जो भी नेता अगला प्रधानमंत्री बनेगा, उसे संसद में बहुमत की कमी, विपक्ष के साथ तालमेल और जनता का विश्वास वापस जीतने जैसी कठिन चुनौतियों का सामना करना होगा।