वॉशिंगटन, 25 फरवरी।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिकी संसद में संबोधन के दौरान ट्रंप ने दावा किया कि यदि उन्होंने समय रहते हस्तक्षेप न किया होता तो दोनों देशों के बीच हालात परमाणु टकराव तक पहुंच सकते थे और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।
राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को शांत कराने में भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई थी और वैश्विक समुदाय में संभावित सैन्य टकराव को लेकर चिंता बढ़ रही थी। ट्रंप ने कहा, “अगर हमने मध्यस्थता न की होती तो हालात बेहद गंभीर हो सकते थे।”
हालांकि, ट्रंप ने अपने दावे के समर्थन में कोई ठोस विवरण सार्वजनिक नहीं किया और न ही यह स्पष्ट किया कि उनका हस्तक्षेप किस स्तर पर और किस प्रकार का था। भारत और पाकिस्तान की ओर से भी उनके इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अपने संबोधन में ट्रंप ने यह भी कहा कि उनके प्रशासन ने अन्य क्षेत्रों में भी शांति प्रयास किए हैं। उन्होंने इजराइल-ईरान, आर्मेनिया-अजरबैजान और अफ्रीकी देशों के बीच संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि कूटनीतिक पहल के जरिए तनाव कम करने की कोशिशें की गईं। उन्होंने अपने सहयोगियों स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और विदेश मंत्री मार्को रुबियो की सराहना भी की।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच समय-समय पर तनाव की स्थिति बनती रही है, लेकिन दोनों देश कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर संतुलन बनाए रखने की कोशिश करते रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई चर्चा को जन्म दे सकता है।
फिलहाल, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रंप के दावे पर भारत, पाकिस्तान और अमेरिकी प्रशासन की ओर से आगे क्या आधिकारिक प्रतिक्रिया आती है।