शीर्ष डॉक्टर ने अल्बानीज़ की मेडिकेयर नीति की कड़ी आलोचना की

डॉ. निक कोट्सवर्थ ने 8.5 अरब डॉलर की योजना को बताया ‘कमज़ोर और त्रुटिपूर्ण’

शीर्ष डॉक्टर ने अल्बानीज़ की मेडिकेयर नीति की कड़ी आलोचना की

कैनबरा: ऑस्ट्रेलिया के पूर्व उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. निक कोट्सवर्थ ने प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की सरकार द्वारा घोषित 8.5 अरब डॉलर की मेडिकेयर निवेश योजना को कठघरे में खड़ा किया है। उन्होंने इस योजना को ‘गहराई से त्रुटिपूर्ण और आसानी से विफल होने वाली’ नीति बताया है।

डॉ. कोट्सवर्थ, जो महामारी के दौरान सरकार के चिकित्सा सलाहकारों में शामिल रहे थे, ने खुले तौर पर कहा कि यह भारी-भरकम निवेश ज़रूरतमंद मरीजों की मूलभूत आवश्यकताओं को पूरा करने में असफल रहेगा। उनके अनुसार, योजना में संसाधनों का बंटवारा अनुचित है और इससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद नहीं की जा सकती।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस नीति की रूपरेखा में संशोधन नहीं किया गया, तो यह मेडिकेयर प्रणाली पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है, जिससे मरीजों को बेहतर इलाज की बजाय और अधिक अव्यवस्था का सामना करना पड़ेगा।

क्या है अल्बानीज़ सरकार की योजना?
अल्बानीज़ सरकार ने घोषणा की थी कि वह मेडिकेयर प्रणाली को मज़बूत करने के लिए अगले कुछ वर्षों में $8.5 बिलियन (AUD) का निवेश करेगी। इस योजना का उद्देश्य अधिक डॉक्टरों को मरीजों तक पहुंचाना, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार करना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा को सशक्त बनाना है।

हालांकि, डॉ. कोट्सवर्थ का मानना है कि केवल पैसे झोंकने से स्वास्थ्य तंत्र नहीं सुधरेगा, बल्कि नीति में दृष्टिकोण का व्यापक बदलाव ज़रूरी है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया
विपक्ष ने भी इस बयान को मुद्दा बनाकर सरकार की नीति पर सवाल उठाए हैं। एक वरिष्ठ लिबरल सांसद ने कहा, “जब देश के शीर्ष चिकित्सा अधिकारी ही इस योजना पर भरोसा नहीं कर रहे, तो आम जनता को इस पर कैसे विश्वास होगा?”

सरकार की प्रतिक्रिया
स्वास्थ्य मंत्री ने डॉ. कोट्सवर्थ की आलोचना को “राजनीतिक दृष्टिकोण से प्रेरित” बताते हुए कहा कि यह निवेश देशभर के नागरिकों को सस्ती और सुलभ चिकित्सा सेवा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

निष्कर्ष
डॉ. कोट्सवर्थ की तीखी टिप्पणी ने मेडिकेयर सुधारों को लेकर राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अब अपने दृष्टिकोण पर पुनर्विचार करना चाहिए और स्वास्थ्य नीति को ज़मीनी हकीकत के अनुरूप बनाना चाहिए।