वॉशिंगटन। अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से चल रहे टिकटॉक विवाद पर अब समाधान की ओर कदम बढ़ गए हैं। व्हाइट हाउस ने जानकारी दी है कि प्रस्तावित सौदे के तहत टिकटॉक के संचालन और इसके एल्गोरिदम पर अमेरिकी कंपनियों का नियंत्रण रहेगा। साथ ही, सात सदस्यीय बोर्ड में छह सीटें अमेरिकी नागरिकों के पास होंगी।
इस समझौते के अनुसार टिकटॉक के सबसे संवेदनशील हिस्से—यानी वीडियो फीड चलाने वाले एल्गोरिदम—का प्रबंधन अमेरिकी पक्ष करेगा। डेटा सुरक्षा और संरक्षा की जिम्मेदारी अमेरिकी टेक दिग्गज ओरेकल को दी जाएगी। इसका मतलब है कि अमेरिकी यूजर्स की जानकारी और गोपनीयता की सुरक्षा अब अमेरिका के हाथों में रहेगी।
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि यह सौदा तय हो गया है। अब केवल औपचारिक हस्ताक्षर होने बाकी हैं। राष्ट्रपति की टीम अपने चीनी समकक्षों के साथ मिलकर अंतिम रूप देने में जुटी है।”
शुक्रवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई। इसमें टिकटॉक डील के मसले पर विस्तृत चर्चा हुई। ट्रंप ने साफ कहा कि अमेरिकी निवेशक तैयार हैं और शी जिनपिंग का रुख भी सहयोगपूर्ण है।
हालांकि चीनी सरकार की ओर से बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि बाइटडांस (टिकटॉक की मूल कंपनी) अपनी नियंत्रक हिस्सेदारी बेचने पर सहमत हुई है या नहीं।
गौरतलब है कि इस साल जनवरी में अमेरिकी कांग्रेस ने टिकटॉक पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून पास किया था। इसके बावजूद ट्रंप प्रशासन ने बार-बार आदेश जारी कर टिकटॉक को अस्थायी छूट दी ताकि अमेरिकी और चीनी पक्षों के बीच समझौते की राह बन सके।
लेविट ने उम्मीद जताई कि आने वाले दिनों में इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि यह सौदा न केवल अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा बल्कि लाखों यूजर्स की निजता के लिए भी बड़ा कदम साबित होगा।