तेजस्वी यादव का दांव पड़ा उल्टा? चुनाव आयोग ने फर्जीवाड़े की जांच शुरू की, दो वोटर कार्ड मिलने पर मचा हड़कंप

तेजस्वी यादव का दांव पड़ा उल्टा? चुनाव आयोग ने फर्जीवाड़े की जांच शुरू की, दो वोटर कार्ड मिलने पर मचा हड़कंप

पटना। बिहार की सियासत में एक बार फिर गर्मी आ गई है। आरजेडी नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव की ओर से लगाए गए आरोपों को चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेजस्वी ने दावा किया था कि उनका नाम बिहार की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, लेकिन चुनाव आयोग ने इसे "बेबुनियाद" बताया है। इतना ही नहीं, अब मामला और भी गंभीर हो गया है क्योंकि आयोग ने तेजस्वी यादव के नाम से जुड़े दो अलग-अलग वोटर आईडी की जांच शुरू कर दी है।

आयोग ने क्या कहा?

चुनाव आयोग ने साफ किया कि तेजस्वी यादव का नाम पटना जिले के विधान सभा क्षेत्र 161-दीघा के मतदान केंद्र संख्या 336 पर मौजूद है। आयोग ने वोटर लिस्ट से नाम गायब होने के आरोप को निराधार बताया। आयोग ने यह भी कहा कि वोटर लिस्ट की प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के अनुसार होती है।

दो वोटर कार्ड पर शक

अब जो बात चर्चा में है, वह कहीं ज्यादा गंभीर है। आयोग को शक है कि तेजस्वी यादव के नाम से दो अलग-अलग जगहों पर वोटर कार्ड जारी हुए हैं — एक दीघा विधानसभा में और दूसरा किसी अन्य क्षेत्र में। यदि यह आरोप सही साबित होता है, तो यह जनप्रतिनिधित्व कानून के उल्लंघन के तहत बड़ा फर्जीवाड़ा माना जाएगा।

क्या है राजनीतिक मायने?

तेजस्वी यादव ने खुद को "राजनीतिक साजिश" का शिकार बताते हुए कहा था कि उनके नाम को जानबूझकर वोटर लिस्ट से हटाया गया है। लेकिन आयोग की सख्ती और प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों ने अब उनके दावे को ही कठघरे में ला खड़ा किया है। अगर दो वोटर कार्ड की बात सही पाई जाती है, तो यह न सिर्फ उनकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि कानूनी कार्रवाई का भी खतरा मंडरा सकता है।