सिडनी की पुरानी ट्रेनें हुईं नई – ₹450 करोड़ की ‘टंगारा’ ट्रेन मेकओवर की शुरुआत

सिडनी की पुरानी ट्रेनें हुईं नई – ₹450 करोड़ की ‘टंगारा’ ट्रेन मेकओवर की शुरुआत

न्यू साउथ वेल्स (NSW) सरकार ने सिडनी की पुरानी “टंगारा” ट्रेनों को नया जीवन देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। लगभग ₹447 करोड़ (450 मिलियन डॉलर) की लागत से शुरू किए गए “टंगारा लाइफ एक्सटेंशन प्रोग्राम” के तहत पहली अपग्रेडेड ट्रेन को गुरुवार को जनता के सामने पेश किया गया।

मुख्यमंत्री क्रिस मिन्स ने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में कुल 55 आठ-कोच वाली ट्रेनों को नया रूप दिया जाएगा। उनका कहना है, “अब ये ट्रेनें ऐसी लगेंगी मानो अभी-अभी फैक्ट्री से निकली हों।”

🔧 आधुनिक तकनीक और नई सुविधाएं

अपग्रेडेड टंगारा ट्रेनें अब कई नई सुविधाओं से लैस होंगी—

  • हर डिब्बे में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

  • यात्रियों के लिए नई ‘हेल्प पॉइंट’ व्यवस्था होगी, जिससे वे सीधे ट्रेन गार्ड से बात कर सकेंगे।

  • हर कोच में नए सूचना स्क्रीन लगाई गई हैं जो यात्रा से जुड़ी जानकारी देंगी।

सिडनी ट्रेन्स के सीईओ मैट लॉन्गलैंड ने कहा, “ये ट्रेनें हमारे बेड़े की रीढ़ हैं, खासकर T4 लाइन पर। लेकिन ये नई वारटाह ट्रेनों की तुलना में तीन से चार गुना कम भरोसेमंद थीं। यह अपग्रेड सिस्टम की विश्वसनीयता और सुरक्षा दोनों बढ़ाएगा।”

🛠 200 से अधिक नौकरियां और 10 साल की उम्र में बढ़ोतरी

इस परियोजना से 200 से ज्यादा तकनीकी और इंजीनियरिंग नौकरियां पैदा होंगी। सरकार को उम्मीद है कि इन सुधारों से टंगारा ट्रेनों की सेवा अवधि कम से कम 10 साल और बढ़ जाएगी।

🚆 भविष्य की योजना: ‘टंगारा 2.0’ और स्थानीय निर्माण पर जोर

मुख्यमंत्री मिन्स ने कहा कि राज्य सरकार अब भविष्य की रेल योजनाओं में ऑस्ट्रेलिया में निर्मित ट्रेनों को प्राथमिकता देगी, भले ही उनकी लागत थोड़ी अधिक क्यों न हो।
उन्होंने कहा, “हम ऑस्ट्रेलियाई तकनीक पर भरोसा करते हैं। यह लंबे समय तक चलने वाला समाधान है, जो अंततः लागत बचाता है।”

परिवहन मंत्री जॉन ग्राहम ने बताया कि टंगारा के स्थान पर आने वाले नए ट्रेन सेट की योजना पर तेजी से काम हो रहा है। उन्होंने कहा, “हम चाहते हैं कि ये ट्रेनें यहीं NSW में बनें, जिससे स्थानीय नौकरियों और कौशल को बढ़ावा मिले।”

🚉 भारी रेल नेटवर्क पर ध्यान

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल के वर्षों में “मेट्रो परियोजनाओं पर अधिक खर्च के कारण भारी रेल नेटवर्क उपेक्षित हुआ है।”
उन्होंने जोड़ा, “हमें मेट्रो के साथ-साथ पारंपरिक रेल सेवाओं को भी समान महत्व देना होगा। सिडनी के लाखों लोग रोज़ इन पर निर्भर हैं।”