कैनबरा। विपक्ष की नेता सुसान ले ने शनिवार को अपनी शैडो कैबिनेट (छाया मंत्रिमंडल) में बड़ा फेरबदल किया। यह फेरबदल सीनेटर जसिंटा प्राइस को बैकबेंच पर भेजे जाने के बाद किया गया है। प्राइस की विवादित टिप्पणी—जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि लेबर सरकार भारतीय प्रवासियों को वोट बैंक बनाने के लिए प्राथमिकता देती है—ने पार्टी के भीतर बवाल खड़ा कर दिया था।
प्राइस के इस्तीफे और अनुशासनात्मक कार्रवाई के बाद अब ले ने नए चेहरों और भरोसेमंद नेताओं को आगे लाकर पार्टी में नई ऊर्जा और दिशा देने की कोशिश की है।
विक्टोरियन सीनेटर जेम्स पैटरसन को विपक्षी नेतृत्व समूह में शामिल कर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। पैटरसन पहले से ही वित्त मामलों के प्रवक्ता हैं, लेकिन अब उन्हें विपक्ष की आर्थिक नीतियों को आकार देने की केंद्रीय भूमिका दी गई है।
ले ने कहा, “पैटरसन हमारी आर्थिक एजेंडा तैयार करने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। यह उचित है कि उन्हें नेतृत्व समूह का हिस्सा बनाया जाए।”
यह नियुक्ति ऐसे समय आई है जब सुसान ले इस हफ्ते CEDA (कमेटी फॉर इकनॉमिक डेवलपमेंट ऑफ ऑस्ट्रेलिया) को संबोधित करने वाली हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह भाषण ले के नेतृत्व में लिबरल पार्टी की आर्थिक दिशा को नया मोड़ देगा।
कुक से सांसद सायमन कैनेडी को बाहरी शैडो मंत्रालय में शामिल किया गया है। उन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल इकॉनमी और सरकारी खर्च की निगरानी का कार्यभार दिया गया है।
कैनेडी ने नियुक्ति के बाद कहा कि उनकी प्राथमिकता सरकारी खर्च में हो रही बर्बादी पर लगाम लगाना होगी। उन्होंने कहा, “लेबर सरकार के दौरान खर्च आसमान छू रहा है, लेकिन नतीजे बिगड़े हैं। हर डॉलर को उतनी मेहनत करनी चाहिए जितनी ऑस्ट्रेलियाई नागरिक करते हैं।”
आर्थिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कैनेडी ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में कॉमनवेल्थ के भुगतान 777.5 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो देश की जीडीपी का 27 प्रतिशत है।
पूर्व मंत्री मेलिसा प्राइस को भी शैडो मंत्रालय में ऊपर उठाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, उन्हें क्षेत्रीय विकास और संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर ज्यादा दायित्व दिए गए हैं।
सीनेटर जसिंटा प्राइस ने हाल ही में सार्वजनिक मंच से यह दावा किया था कि लेबर सरकार भारतीय मूल के प्रवासियों को राजनीतिक लाभ के लिए प्राथमिकता दे रही है।
उनके इस बयान से पार्टी में जमकर विवाद हुआ। जब उनसे माफी मांगी गई तो उन्होंने इनकार कर दिया और सुसान ले के नेतृत्व को सार्वजनिक रूप से समर्थन भी नहीं दिया। इसके बाद ले ने उनसे इस्तीफा मांगा और उन्हें बैकबेंच पर भेज दिया।
यह फेरबदल केवल दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि लिबरल पार्टी में नई रणनीति और नेतृत्व ढांचा बनाने की पहल माना जा रहा है। सुसान ले ने पैटरसन जैसे भरोसेमंद नेताओं को आगे लाकर संकेत दिया है कि आने वाले महीनों में विपक्ष आर्थिक मुद्दों और सरकारी खर्च की आलोचना को केंद्र में रखकर जनता तक पहुंचेगा।