सुशीला कार्की ने राष्ट्रपति को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की सूची सौंपी है। इसमें ऐसे नाम शामिल किए गए हैं जो अनुभव, ईमानदारी और नई सोच का संतुलन पेश करते हैं।
ओमप्रकाश अर्याल – गृह मंत्री
(पूर्व पुलिस प्रमुख, सख्त प्रशासनिक छवि के लिए मशहूर)
रामेश्वर खनाल – वित्त मंत्री
(पूर्व वित्त सचिव, आर्थिक सुधारों और पारदर्शी नीतियों के पक्षधर)
कुलमान घीसिंग – ऊर्जा मंत्री
(नेपाल की ऊर्जा व्यवस्था में सुधार के लिए पहले भी चर्चित)
बालानंद शर्मा – रक्षा मंत्री
(सेना से जुड़े रहे, सुरक्षा और शांति मिशनों का अनुभव रखते हैं)
पारस खड़का – युवा एवं खेलकूद मंत्री
(पूर्व क्रिकेट कप्तान, युवाओं और खेल जगत का लोकप्रिय चेहरा)
असीम मान सिंह बस्नेत – भौतिक अवसंरचना एवं यातायात मंत्री
(उद्योगपति, आधुनिक अवसंरचना विकास को बढ़ावा देने की सोच रखते हैं)
बाक़ी मंत्रालयों के लिए चर्चा जारी है और अनुमान है कि मंत्रिपरिषद का विस्तार 15 सितम्बर को शपथ ग्रहण के साथ होगा।
इस सरकार के गठन में Gen-Z युवाओं की निर्णायक भूमिका रही।
वे भ्रष्टाचार के खिलाफ सबसे मुखर आवाज़ बने।
उन्होंने सोशल मीडिया और सड़कों पर निरंतर दबाव बनाकर राजनीतिक दलों को झुकने पर मजबूर किया।
युवाओं की मांग थी कि “हमारे प्रतिनिधि हमारे जैसे हों”। इसी कारण पारस खड़का जैसे युवा प्रतीक को शामिल करना एक बड़ा संदेश है।
नई सरकार का उद्देश्य है युवाओं को न सिर्फ सुना जाए बल्कि शासन तंत्र में उनकी सीधी भागीदारी सुनिश्चित की जाए।
आर्थिक संकट से निपटना – महंगाई, बेरोजगारी और विदेशी निवेश में गिरावट नेपाल के लिए सबसे बड़ी समस्या है।
कानून व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर अंकुश – जनता सरकार से तुरंत कार्रवाई की उम्मीद कर रही है।
चुनाव की तैयारी – अंतरिम सरकार की असली कसौटी मार्च 2026 तक निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराना होगा।
सीमावर्ती चुनौतियाँ – नेपाल को भारत और चीन के बीच संतुलन साधते हुए अपनी संप्रभुता बनाए रखनी है।