नई दिल्ली, 24 जुलाई 2025 – सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को वैवाहिक विवादों में गिरफ्तारी को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दांपत्य जीवन में उत्पीड़न से जुड़े मामलों (धारा 498A आईपीसी) में आरोपियों की तात्कालिक गिरफ्तारी पर रोक संबंधी इलाहाबाद हाई कोर्ट की गाइडलाइंस जारी रहेंगी। इसके तहत पुलिस अब ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज होने के बाद कम से कम दो महीने तक गिरफ्तारी नहीं कर सकेगी।
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक वैवाहिक विवाद के मामले में याचिकाकर्ता ने तुरंत गिरफ्तारी से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने इस पर सुनवाई करते हुए कहा कि हाई कोर्ट द्वारा पहले से जारी दिशानिर्देशों में किसी बदलाव की आवश्यकता नहीं है, और ये दिशानिर्देश फिलहाल प्रभावी रहेंगे।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में अपने एक फैसले में कहा था कि विवाह से जुड़े आपराधिक मामलों में जैसे ही शिकायत दर्ज होती है, पुलिस को तुरंत गिरफ्तारी नहीं करनी चाहिए। इसके बजाय पुलिस को:
दो महीने का समय देना चाहिए, ताकि दोनों पक्ष सुलह का प्रयास कर सकें।
परिवार कल्याण समिति की रिपोर्ट का इंतजार करना चाहिए, जो मामले की गंभीरता और सच्चाई का मूल्यांकन करेगी।
तभी आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए।
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस प्रकार की शिकायतों में अक्सर झूठे आरोप लगाए जाते हैं, जिससे आरोपी पक्ष को अनावश्यक रूप से मानसिक और सामाजिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर दखल देने से इनकार करते हुए संकेत दिया कि हाई कोर्ट के दिशानिर्देश न केवल वैधानिक दायरे में हैं, बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी संतुलित हैं। न्यायालय का यह रुख ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में वैवाहिक विवादों में दुरुपयोग की बढ़ती शिकायतें सामने आ रही हैं।