कक्षा 8 की किताब से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटेगा, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

कक्षा 8 की किताब से ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय हटेगा, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

नई दिल्ली, 27 फरवरी।
देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़े एक बड़े घटनाक्रम में National Council of Educational Research and Training (एनसीईआरटी) ने कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक से “न्यायपालिका में भ्रष्टाचार” से संबंधित अध्याय हटाने का निर्णय लिया है। यह कदम Supreme Court of India की कड़ी आपत्ति और हस्तक्षेप के बाद उठाया गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने इस सामग्री को न्यायपालिका की गरिमा के प्रतिकूल मानते हुए तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने जताई गंभीर आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर स्वतः संज्ञान लेते हुए कहा कि विद्यालयी पाठ्यपुस्तकों में प्रस्तुत सामग्री संतुलित, तथ्यपरक और संस्थाओं की संवैधानिक मर्यादा के अनुरूप होनी चाहिए। अदालत ने टिप्पणी की कि यदि किसी विषय को पढ़ाया भी जाता है तो उसे संदर्भ, प्रमाण और व्यापक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाना चाहिए, न कि एकतरफा ढंग से।

न्यायालय ने एनसीईआरटी को निर्देश दिया है कि—

  • विवादित अध्याय को तुरंत प्रभाव से हटाया जाए,

  • किताब की हार्ड कॉपियों का वितरण रोका जाए,

  • वेबसाइट और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म से संबंधित सामग्री हटाई जाए,

  • तथा इस संबंध में अनुपालन रिपोर्ट निर्धारित समय के भीतर प्रस्तुत की जाए।

एनसीईआरटी की सफाई और माफी

विवाद बढ़ने के बाद एनसीईआरटी ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि संबंधित अंश अनजाने में प्रकाशित हुआ और इसका उद्देश्य किसी संवैधानिक संस्था की छवि को धूमिल करना नहीं था। परिषद ने बिना शर्त माफी मांगते हुए आश्वासन दिया कि भविष्य में पाठ्यसामग्री की समीक्षा प्रक्रिया को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।

संस्था ने यह भी स्पष्ट किया कि संशोधित संस्करण जल्द ही जारी किया जाएगा और छात्रों की पढ़ाई पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े, इसके लिए वैकल्पिक सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी।

शिक्षा जगत में बहस

इस प्रकरण के बाद शिक्षा विशेषज्ञों और विधि जानकारों के बीच बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में संस्थाओं की कार्यप्रणाली और चुनौतियों पर चर्चा जरूरी है, ताकि विद्यार्थियों में समालोचनात्मक सोच विकसित हो। वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि स्कूली स्तर पर विषयों की प्रस्तुति अत्यंत सावधानी और संतुलन के साथ होनी चाहिए।

सरकार की प्रतिक्रिया

केंद्र सरकार के शिक्षा विभाग ने भी मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि न्यायपालिका देश के लोकतांत्रिक ढांचे का अहम स्तंभ है और उसकी प्रतिष्ठा सर्वोपरि है। विभाग ने एनसीईआरटी से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए आंतरिक समीक्षा तंत्र मजबूत करने की बात कही है।

आगे की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तिथि निर्धारित की है, जिसमें अनुपालन रिपोर्ट और उठाए गए कदमों की समीक्षा की जाएगी। यह मामला न केवल पाठ्यपुस्तकों की सामग्री की विश्वसनीयता, बल्कि शैक्षणिक स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान के बीच संतुलन का भी महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है।