सुप्रीम कोर्ट ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े कथित षड्यंत्र मामले में आरोपी उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया है। हालांकि, अदालत ने इस मामले में शामिल अन्य पांच आरोपियों को जमानत प्रदान करते हुए स्पष्ट किया कि सभी आरोपियों की भूमिका समान नहीं है।
न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर उमर खालिद और शरजील इमाम के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) के तहत प्रथम दृष्टया मामला बनता है। अदालत के अनुसार, दोनों की भूमिका केवल स्थानीय घटनाओं तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि वे कथित रूप से योजना बनाने, लोगों को संगठित करने और रणनीतिक दिशा देने के स्तर पर शामिल थे।
शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि इस मामले में सभी आरोपी एक ही स्तर पर नहीं हैं। इसी आधार पर गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद को जमानत दी गई। अदालत ने कहा कि इन आरोपियों की कथित भूमिका सीमित प्रकृति की है, जिससे उन्हें जमानत देने में कोई वैधानिक बाधा नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यूएपीए की धारा 43डी(5) संसद के उस विधायी निर्णय को दर्शाती है, जिसके तहत राज्य की सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों में जमानत के लिए कड़े मानदंड तय किए गए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अदालतें वैधानिक सीमाओं की अनदेखी नहीं कर सकतीं।
अदालत ने यह भी स्वीकार किया कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता एक अत्यंत महत्वपूर्ण अधिकार है और ट्रायल से पहले लंबे समय तक हिरासत में रखना एक गंभीर संवैधानिक चिंता हो सकती है। हालांकि, मौजूदा मामले में अदालत इस निष्कर्ष पर नहीं पहुंची कि अब तक की हिरासत संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य स्तर तक पहुंच चुकी है।
सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम को यह स्वतंत्रता दी है कि वे सुरक्षा प्राप्त गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद या एक वर्ष की अवधि पूरी होने पर पुनः जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं।
अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता, अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था स्वयं संवैधानिक मूल्य हैं, और इनकी रक्षा के लिए संसद को विशेष कानून बनाने का अधिकार प्राप्त है। जब ऐसे कानून संवैधानिक ढांचे के अनुरूप हों, तो न्यायालयों का कर्तव्य है कि वे उन्हें प्रभावी रूप से लागू करें।