कोलंबो, 12 सितंबर 2025 — श्रीलंका की संसद ने हाल ही में एक ऐसा कानून पारित किया है, जिसने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। “President’s Entitlement (Repeal) Act” के नाम से बने इस कानून के तहत अब देश के पूर्व राष्ट्रपतियों को वह तमाम सरकारी सुविधाएँ छोड़नी होंगी, जिनका वे दशकों से आनंद उठा रहे थे।
इस कानून के लागू होने के बाद, किसी भी पूर्व राष्ट्रपति को निम्नलिखित सरकारी लाभ नहीं मिलेंगे:
सरकारी आवास: अब तक पूर्व राष्ट्रपतियों को कोलंबो के पॉश इलाके में आलीशान बंगलों में रहने का अधिकार मिला हुआ था। लेकिन अब उन्हें तीन महीने का नोटिस देकर ये बंगले खाली करने होंगे।
मासिक भत्ता व अन्य अलाउंस: पेंशन को छोड़कर हर तरह का भत्ता और विशेष अलाउंस बंद कर दिए जाएंगे।
वाहन व ड्राइवर: पहले उन्हें लग्ज़री गाड़ियों और ड्राइवर की सुविधा मिलती थी, जो अब समाप्त होगी।
सुरक्षा व्यवस्था: व्यक्तिगत सुरक्षा गार्ड और विशेष सुरक्षा स्क्वॉड की सुविधा अब नहीं दी जाएगी।
महिंदा राजपक्षे (80 वर्ष): श्रीलंका के शक्तिशाली पूर्व राष्ट्रपति और पूर्व प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे को सबसे पहले इसका असर झेलना पड़ा। उन्हें कोलंबो स्थित “सिनामन गार्डन” का सरकारी बंगला खाली करना पड़ा।
चंद्रिका कुमारतुंगा: श्रीलंका की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं चंद्रिका कुमारतुंगा ने भी कहा कि उन्होंने नया निजी घर ले लिया है, लेकिन उसके नवीनीकरण का काम चल रहा है।
अन्य पूर्व राष्ट्रपति: सभी पूर्व राष्ट्रपतियों को अब अपनी सुरक्षा और आवास की व्यवस्था खुद करनी होगी।
यह विधेयक जुलाई 2025 में कैबिनेट की मंजूरी के बाद संसद में पेश किया गया। विपक्ष ने इसका विरोध किया, लेकिन जब मतदान हुआ तो 151 सांसदों ने इसके पक्ष में और सिर्फ 1 सांसद ने विरोध में वोट डाला।
महिंदा राजपक्षे और उनके परिवार ने इस कानून को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कह दिया कि यह कानून संविधान के अनुरूप है और सरकार को खर्च कम करने का अधिकार है।
श्रीलंका बीते कुछ वर्षों से भीषण आर्थिक संकट झेल रहा है। विदेशी कर्ज़, महँगाई और बेरोजगारी ने देश की कमर तोड़ रखी है।
नए राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने चुनावी प्रचार के दौरान वादा किया था कि वह “पूर्व नेताओं पर होने वाले फिजूलखर्च” को खत्म करेंगे और सरकारी धन को जनता के कल्याण पर खर्च करेंगे।
यह कानून उसी वादे का हिस्सा है। सरकार का दावा है कि पूर्व राष्ट्रपतियों पर होने वाले खर्च में कटौती से कोष को हर साल करोड़ों डॉलर की बचत होगी।
समर्थन: आम जनता इस कदम का स्वागत कर रही है। लोगों का कहना है कि जनता टैक्स देती है, तो उसका इस्तेमाल देश की तरक्की और ज़रूरतमंदों के लिए होना चाहिए, न कि उन नेताओं के लिए जो सत्ता छोड़ चुके हैं।
आलोचना: दूसरी ओर, कुछ लोग इसे “राजनीतिक प्रतिशोध” मान रहे हैं। उनका कहना है कि 80 साल के बुजुर्ग महिंदा राजपक्षे को सुविधाओं से वंचित करना अमानवीय है।