ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की शिक्षा की बढ़ती लागत ने बढ़ाई परिवारों की चिंता

ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की शिक्षा की बढ़ती लागत ने बढ़ाई परिवारों की चिंता

सिडनी।
ऑस्ट्रेलिया में बच्चों की शिक्षा अब केवल एक सामाजिक ज़रूरत नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक बोझ बनती जा रही है। हाल ही में जारी एक नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि एक बच्चे को स्कूल से लेकर उच्च माध्यमिक स्तर तक पढ़ाने में माता-पिता को भारी-भरकम खर्च उठाना पड़ रहा है। बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन की लागत के बीच शिक्षा पर होने वाला यह खर्च ऑस्ट्रेलियाई परिवारों की कमर तोड़ता नज़र आ रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षा की लागत सभी क्षेत्रों—सरकारी, कैथोलिक और निजी स्कूलों—में तेज़ी से बढ़ी है। हालांकि निजी स्कूलों में यह बढ़ोतरी सबसे अधिक देखी गई है, लेकिन सरकारी स्कूलों में पढ़ाई भी अब पहले जितनी सस्ती नहीं रही।

सरकारी स्कूलों में छिपे खर्च

सरकारी स्कूलों की फीस भले ही कम हो, लेकिन किताबें, स्कूल यूनिफॉर्म, लैपटॉप और टैबलेट जैसे डिजिटल उपकरण, स्कूल ट्रिप, खेलकूद और अन्य सह-शैक्षणिक गतिविधियों के कारण कुल खर्च काफ़ी बढ़ जाता है। कई माता-पिता का कहना है कि साल की शुरुआत में आने वाला “बैक-टू-स्कूल” खर्च उनके घरेलू बजट को बुरी तरह प्रभावित करता है।

निजी स्कूलों में शिक्षा बनी विलासिता

रिपोर्ट बताती है कि निजी स्कूलों में पढ़ाई कराना अब कई परिवारों के लिए एक तरह की विलासिता बन गया है। किंडरगार्टन से लेकर कक्षा 12 तक की पढ़ाई पर कुल खर्च लाखों डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें ट्यूशन फीस के साथ-साथ परिवहन, अतिरिक्त कोचिंग, खेल गतिविधियां और अन्य कार्यक्रमों का खर्च भी शामिल होता है।

महंगाई और शिक्षा खर्च का दोहरा दबाव

यह रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है जब ऑस्ट्रेलियाई परिवार पहले ही बढ़ते किराए, होम लोन की किस्तों, बिजली-पानी के बिल और खाद्य पदार्थों की महंगाई से जूझ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि शिक्षा खर्च में बढ़ोतरी ने मध्यम वर्गीय परिवारों पर दोहरा आर्थिक दबाव डाल दिया है।

माता-पिता की बढ़ती चिंता

कई अभिभावकों ने चिंता जताई है कि वे बच्चों को बेहतर भविष्य देना चाहते हैं, लेकिन लगातार बढ़ते खर्च के कारण उन्हें कठिन फैसले लेने पड़ रहे हैं। कुछ परिवार बच्चों की अतिरिक्त गतिविधियों में कटौती कर रहे हैं, तो कुछ को स्कूल बदलने या शिक्षा से जुड़े सपनों से समझौता करना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की राय

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता को स्कूल का चयन करते समय केवल प्रतिष्ठा या ब्रांड पर नहीं, बल्कि कुल दीर्घकालिक लागत और बच्चे की वास्तविक ज़रूरतों पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही सरकार से भी मांग उठ रही है कि शिक्षा को अधिक सुलभ और किफायती बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

भविष्य की चुनौती

विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि शिक्षा की लागत इसी तरह बढ़ती रही, तो आने वाले वर्षों में यह सामाजिक असमानता को और गहरा कर सकती है, जहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा केवल सीमित वर्ग तक सिमट कर रह जाएगी।