सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत: सीबीआई को नहीं मिले भ्रष्टाचार के सबूत, कोर्ट ने बंद किया केस

सत्येंद्र जैन को बड़ी राहत: सीबीआई को नहीं मिले भ्रष्टाचार के सबूत, कोर्ट ने बंद किया केस

दिल्ली सरकार में पूर्व मंत्री और आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता सत्येंद्र जैन को भ्रष्टाचार के मामले में बड़ी राहत मिली है। दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार मामले में सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए केस बंद करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चार साल की लंबी जांच के बावजूद कोई आपराधिक साक्ष्य नहीं मिला, जिससे किसी भी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई का आधार बन सके।

क्या था मामला?

सीबीआई ने 29 मई 2019 को दिल्ली सरकार के सतर्कता निदेशालय की शिकायत के आधार पर सत्येंद्र जैन और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के अन्य अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। आरोप था कि जैन के मंत्री रहते हुए 17 सदस्यों की 'क्रिएटिव टीम' का गठन नियमों को ताक पर रखकर किया गया और इन्हें असंबंधित परियोजनाओं के फंड से भुगतान किया गया। इस पर अनियमित नियुक्तियों और वित्तीय नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था।

क्या निकला जांच में?

लगभग चार वर्षों तक चली सीबीआई जांच के बाद, अप्रैल 2022 में एजेंसी ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की। जांच में पाया गया कि नियुक्तियों में किसी प्रकार की रिश्वत, निजी लाभ या आपराधिक मंशा के प्रमाण नहीं मिले। रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्तियों की जरूरत वास्तविक थी और इससे न तो सरकारी खजाने को नुकसान हुआ, न ही कोई साजिश सामने आई।

कोर्ट का फैसला

विशेष जज दिग विनय सिंह ने सुनवाई के दौरान कहा कि यदि इतने लंबे समय तक जांच के बावजूद कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला, तो मामले को आगे बढ़ाना न्यायिक संसाधनों का दुरुपयोग होगा। उन्होंने कहा कि हर वह फैसला जो नियमों का शत-प्रतिशत पालन नहीं करता, जरूरी नहीं कि वह भ्रष्टाचार के दायरे में आए, जब तक कि उसे साबित करने के लिए ठोस और स्पष्ट साक्ष्य न हों।

राजनीतिक मायने

यह फैसला सत्येंद्र जैन और आम आदमी पार्टी के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। विपक्ष की ओर से लंबे समय से इस मामले को लेकर सवाल उठाए जा रहे थे, लेकिन अब अदालत के इस निर्णय ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है।