एससीओ शिखर सम्मेलन: पुतिन ने यूक्रेन संकट पर भारत की सराहना की, अमेरिका के ‘मोदी का युद्ध’ बयान को बताया बेबुनियाद

एससीओ शिखर सम्मेलन: पुतिन ने यूक्रेन संकट पर भारत की सराहना की, अमेरिका के ‘मोदी का युद्ध’ बयान को बताया बेबुनियाद

तियानजिन (चीन), 1 सितंबर 2025 – शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 25वें राष्ट्राध्यक्ष परिषद शिखर सम्मेलन में सोमवार को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत और चीन की भूमिका की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने में नई दिल्ली और बीजिंग ने लगातार रचनात्मक प्रयास किए हैं। पुतिन ने इस दौरान अमेरिका के हालिया बयानों को भी खारिज करते हुए कहा कि शांति बहाली की दिशा में भारत की भूमिका अहम है और इसे लेकर कोई भ्रम नहीं फैलाना चाहिए।


पुतिन का अमेरिका पर पलटवार

पुतिन ने विशेष रूप से व्हाइट हाउस के सलाहकार और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सहयोगी पीटर नवारो के उस बयान को निशाने पर लिया जिसमें उन्होंने कहा था कि “यह मूलतः मोदी का युद्ध है।”

पुतिन ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“यूक्रेन में संकट किसी आक्रमण की वजह से नहीं, बल्कि कीव में पश्चिमी देशों के समर्थन से हुए तख्तापलट के कारण खड़ा हुआ। रूस ने बार-बार कहा है कि नाटो का विस्तार और पश्चिमी दखल ही इस टकराव की असली जड़ है।”

उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में अलास्का में राष्ट्रपति ट्रंप के साथ हुई उनकी वार्ता ने यूक्रेन में शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त किया है और इस पर वह द्विपक्षीय मुलाकातों में नेताओं से चर्चा करेंगे।


भारत की कूटनीतिक भूमिका

रूस के राष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीति की तारीफ करते हुए कहा कि भारत हमेशा संवाद और कूटनीति के जरिए विवाद सुलझाने पर जोर देता रहा है।

पुतिन ने कहा कि भारत और चीन जैसे देशों की सक्रियता ने इस संकट को और अधिक बिगड़ने से रोका है। नई दिल्ली लगातार यह रुख दोहराती रही है कि किसी भी शांति वार्ता की बुनियाद संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान होना चाहिए।


अमेरिका-भारत के बीच तेल विवाद

दरअसल, अमेरिकी सलाहकार पीटर नवारो ने भारत पर आरोप लगाया था कि सस्ते दाम पर रूसी तेल खरीदकर वह अप्रत्यक्ष रूप से युद्ध को बढ़ावा दे रहा है। नवारो ने यहां तक कहा था कि यदि भारत तेल खरीदना बंद कर दे तो उसे अमेरिकी टैरिफ में 25 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है।

पुतिन ने इस बयान को “भ्रामक और आधारहीन” करार दिया। उनके अनुसार, भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और जनता के हित में स्वतंत्र निर्णय ले रहा है और इस पर बाहरी दबाव डालना अनुचित है।


मोदी-पुतिन की मुलाकात

शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की द्विपक्षीय बैठक भी चर्चा का केंद्र रही। दोनों नेता एक ही वाहन से बैठक स्थल तक पहुंचे, जो उनकी व्यक्तिगत निकटता और रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है।

बैठक में ऊर्जा सहयोग, रक्षा साझेदारी, और यूक्रेन संकट में शांति बहाली जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। मोदी ने पुतिन से कहा कि दुनिया शांति चाहती है और “हमें जल्द से जल्द युद्ध समाप्त करने का रास्ता ढूंढ़ना होगा।”


निष्कर्ष

तियानजिन में हुआ यह शिखर सम्मेलन भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका को रेखांकित करता है। एक ओर रूस भारत को भरोसेमंद मध्यस्थ और जिम्मेदार साझेदार मानता है, तो दूसरी ओर अमेरिका के बयान अंतरराष्ट्रीय राजनीति में तनाव और दबाव की झलक दिखाते हैं।

भारत फिलहाल दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाकर न केवल अपने हितों की रक्षा कर रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर शांति और स्थिरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।