रूस की चेतावनी: 'उत्तर कोरिया को निशाना बनाया तो भुगतने होंगे नतीजे' – अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया को चेताया

रूस की चेतावनी: 'उत्तर कोरिया को निशाना बनाया तो भुगतने होंगे नतीजे' – अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया को चेताया

मॉस्को/वॉशिंगटन/सियोल, 13 जुलाई 2025
रूस ने अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी त्रिपक्षीय सुरक्षा साझेदारी का उपयोग उत्तर कोरिया को निशाना बनाने के लिए किया गया, तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब इन तीनों देशों ने उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को लेकर आपसी समन्वय और संयुक्त अभ्यासों को तेज करने की योजना बनाई है।

रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़खारोवा ने कहा, "यदि यह त्रिपक्षीय गठबंधन किसी संप्रभु राष्ट्र — विशेष रूप से उत्तर कोरिया — को दबाने या अस्थिर करने की दिशा में आगे बढ़ता है, तो रूस इसे क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए खतरा मानेगा।"

क्यों बढ़ा तनाव?

हाल ही में अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने सैन्य सहयोग बढ़ाने के लिए एक नया सुरक्षा ढांचा स्थापित किया है, जिसमें नियमित सैन्य अभ्यास और खुफिया जानकारी साझा करना शामिल है। इस गठबंधन का उद्देश्य, उनका कहना है, उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु गतिविधियों का मुकाबला करना है।

हालांकि, रूस ने इसे एकतरफा कदम बताते हुए कहा कि इससे कोरियाई प्रायद्वीप और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में तनाव और भी अधिक बढ़ सकता है।

उत्तर कोरिया का समर्थन

रूस और उत्तर कोरिया के बीच हाल के महीनों में संबंधों में गर्माहट देखी गई है। दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच उच्च स्तरीय बातचीत और रक्षा सहयोग को लेकर सहमति बनी है। रूस का मानना है कि पश्चिमी देश उत्तर कोरिया को दबाकर क्षेत्रीय सत्ता संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका की प्रतिक्रिया

इस चेतावनी पर अभी तक अमेरिका की आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पूर्व में वॉशिंगटन ने साफ किया था कि उनका गठबंधन किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के लिए है।

निष्कर्ष

रूस की इस तीखी प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि वैश्विक राजनीति एक बार फिर शीत युद्ध जैसे ध्रुवीकरण की ओर बढ़ रही है, जहां गठबंधनों और सैन्य सहयोगों के ज़रिए शक्ति प्रदर्शन तेज़ हो रहा है। आने वाले समय में कोरियाई प्रायद्वीप एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र बन सकता है।