कैनबरा। ऑस्ट्रेलिया की विपक्षी राजनीति एक बार फिर गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। ताज़ा जनमत सर्वेक्षण में विपक्षी नेता सुसैन ले को पिछले 23 वर्षों में किसी भी प्रमुख पार्टी नेता की तुलना में सबसे अधिक अलोकप्रिय करार दिया गया है। इसके बावजूद उन्होंने साफ संकेत दिया है कि वे नेतृत्व छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
न्यूज़पोल द्वारा किए गए इस सर्वे के अनुसार कोएलिशन की प्राथमिक वोट हिस्सेदारी घटकर केवल 18 प्रतिशत रह गई है, जो किसी भी प्रमुख राजनीतिक गठबंधन के लिए बेहद चिंताजनक मानी जा रही है। वहीं, दक्षिणपंथी वन नेशन पार्टी को 27 प्रतिशत समर्थन मिलने से ऑस्ट्रेलियाई राजनीति में बड़ा बदलाव संकेतित हो रहा है।
सर्वे में शामिल 1234 मतदाताओं में से महज़ 23 प्रतिशत ने सुसैन ले के नेतृत्व को संतोषजनक बताया, जबकि 62 प्रतिशत ने असंतोष जताया। उनकी नेट संतुष्टि रेटिंग माइनस 39 पर पहुँच गई है, जिसे राजनीतिक विश्लेषक “खतरे की घंटी” बता रहे हैं।
यह राजनीतिक संकट ऐसे समय उभरा है जब 2025 के संघीय चुनाव के बाद नौ महीनों के भीतर लिबरल पार्टी और नेशनल पार्टी के गठबंधन में दूसरी बार दरार पड़ी और फिर समझौता हुआ। लगातार सामने आ रही अंदरूनी कलह ने पार्टी की एकजुटता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सुबह के टेलीविजन कार्यक्रमों में सवालों की बौछार के बीच सुसैन ले ने नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें पार्टी रूम का समर्थन प्राप्त है और वे “काम के लिए पूरी तरह तैयार” हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता बढ़ती महंगाई, बजट दबाव और जीवन स्तर में गिरावट से जूझ रही है, जबकि मौजूदा सरकार इन मुद्दों को संभालने में विफल रही है।
“मैं नहीं चाहती कि हमारे बच्चे और पोते-पोती हमसे भी बदतर आर्थिक हालात में जिएँ,” उन्होंने कहा।
इससे पहले एक अन्य टीवी साक्षात्कार में सुसैन ले ने अपेक्षाकृत नरम रुख अपनाते हुए स्वीकार किया कि कोएलिशन की अंदरूनी खींचतान जनता के लिए “निराशाजनक और भ्रमित करने वाली” रही है।
उन्होंने कहा,
“लोगों ने देखा कि हम अपनी ही समस्याओं पर चर्चा कर रहे थे, न कि उनकी ज़िंदगी से जुड़े मुद्दों पर। इसी कारण हमें सज़ा मिली।”
ले के अनुसार, हालिया समझौते के बाद मतभेद सुलझा लिए गए हैं और पार्टी की निर्णय प्रक्रिया को मज़बूत किया गया है।
हालाँकि, पार्टी के अंदर से उठ रही आवाज़ें नेतृत्व पर दबाव बढ़ा रही हैं। वरिष्ठ लिबरल सीनेटर जेन ह्यूम ने सार्वजनिक रूप से नेतृत्व परिवर्तन की मांग तो नहीं की, लेकिन उन्होंने यह साफ कर दिया कि मौजूदा स्थिति “अस्वीकार्य” है।
उन्होंने कहा कि लिबरल पार्टी का प्राथमिक वोट 15 प्रतिशत और नेशनल पार्टी का केवल 3 प्रतिशत पर सिमटना राजनीतिक रूप से बेहद शर्मनाक स्थिति है।
“हमारे सांसद अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में जाकर जवाब नहीं दे पा रहे हैं,” उन्होंने कहा।
ह्यूम ने यह भी चेतावनी दी कि पार्टी के कई युवा और उभरते नेता—जिनका भविष्य उज्ज्वल माना जा रहा था—इस संकट के चलते राजनीति से बाहर हो सकते हैं।
सीनेटर ह्यूम ने पूर्व विपक्षी नेता पीटर डटन का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें भी अलोकप्रियता के चलते हटाया गया था, जबकि उनकी नकारात्मक रेटिंग मौजूदा नेतृत्व से कम थी।
उनके शब्दों में, “अगर तब बदलाव जरूरी था, तो अब और भी ज़्यादा है।”
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि कोएलिशन ने जल्दी ही स्पष्ट दिशा, मज़बूत नेतृत्व और जनता के मुद्दों पर केंद्रित रणनीति नहीं अपनाई, तो आने वाले चुनावों में विपक्ष का जनाधार और सिमट सकता है। वन नेशन जैसी पार्टियों का उभार पारंपरिक राजनीति के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
फिलहाल, सुसैन ले नेतृत्व पर डटी हुई हैं, लेकिन सवाल यही है कि क्या पार्टी और जनता दोनों का भरोसा वे दोबारा जीत पाएँगी।