सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के मामलों की सूची में एक और बड़ा नाम जुड़ गया है। मशहूर ऑडिट और कंसल्टिंग फर्म PwC (प्राइसवाटरहाउस कूपर्स) पर एक पूर्व महिला कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाते हुए मुकदमा दायर किया है।
शिकायतकर्ता, जो कि 2000 के दशक की शुरुआत में PwC में एक कार्यकारी सहायक (Executive Assistant) के पद पर कार्यरत थीं, ने कोर्ट में दायर दस्तावेजों में आरोप लगाया है कि उनके सीनियर मेल बॉस ने उन्हें बार-बार अनुचित और असहज स्थितियों में डाला। महिला के अनुसार, उनके बॉस ने न केवल उनके लिए लिंजरी (अंतर्वस्त्र) खरीदी, बल्कि उनके इनिशियल्स (नाम के प्रारंभिक अक्षर) को अपने बगल के नीचे टैटू के रूप में गुदवा लिया, जो उन्होंने महिला को दिखाया भी।
महिला का दावा है कि जब उन्होंने इस व्यवहार को लेकर विरोध जताया, तो उनकी बात को अनदेखा किया गया और कामकाज में उन्हें धीरे-धीरे किनारे कर दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया है कि PwC के कार्यालय में एक ‘बॉयज़ क्लब’ जैसी संस्कृति है, जहां पुरुष अधिकारियों को खुली छूट मिलती है और महिलाएं डर के माहौल में काम करती हैं।
उन्होंने कोर्ट में कहा, “मैंने खुद को एक ऐसी जगह पर पाया जहां मेरी योग्यता से ज्यादा मेरे लुक्स और व्यवहार पर ध्यान दिया जा रहा था। यह मानसिक रूप से बेहद थकाने वाला और अपमानजनक अनुभव था।”
कंपनी की प्रतिक्रिया
PwC की ओर से इस मामले में अब तक कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, सूत्रों के अनुसार कंपनी ने इस शिकायत की आंतरिक समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है और कानून विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।
ऑस्ट्रेलिया में कार्यस्थल संस्कृति पर बहस
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब ऑस्ट्रेलिया में कई बड़ी कंपनियों और संगठनों पर कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ अनुचित व्यवहार को लेकर जांच चल रही है। PwC जैसे प्रतिष्ठित संस्थान पर ऐसे आरोप लगना इस बात को दर्शाता है कि सिर्फ नीति बनाना काफी नहीं, बल्कि व्यवहार में बदलाव और जवाबदेही भी जरूरी है।
आगे की कार्रवाई
इस मामले की सुनवाई आगामी हफ्तों में ऑस्ट्रेलियाई अदालत में शुरू होने की उम्मीद है। महिला ने आर्थिक हर्जाने और मानसिक प्रताड़ना की क्षतिपूर्ति की मांग की है। यह देखना बाकी है कि PwC अपनी प्रतिष्ठा और जवाबदेही को बचाने के लिए क्या कदम उठाती है।
नोट: यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है, अतः किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले अदालत के निर्णय का इंतजार करना उचित होगा।