मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर सियासी संग्राम, सीएम योगी और अजय राय आमने-सामने

मणिकर्णिका घाट पुनर्विकास पर सियासी संग्राम, सीएम योगी और अजय राय आमने-सामने

वाराणसी। मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्विकास कार्य को लेकर उत्तर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय के बीच तीखी बयानबाजी जारी है।

मणिकर्णिका घाट पर प्रस्तावित तीर्थ कॉरिडोर और सौंदर्यीकरण परियोजना के तहत कुछ पुराने ढांचों और एक मढ़ी (चबूतरे) को हटाए जाने के बाद विवाद ने तूल पकड़ लिया। सोशल मीडिया पर बुलडोजर चलने और कुछ मूर्तियों के जमीन पर पड़े होने के वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं। इसके बाद कांग्रेस और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि विकास के नाम पर लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की प्राचीन प्रतिमा और पौराणिक मंदिरों को नुकसान पहुंचाया गया है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा विकास के नाम पर काशी की ऐतिहासिक और धार्मिक विरासत को नष्ट कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित मूर्तियों को तोड़ना काशी का अपमान है। राय ने यह भी कहा कि सरकार एक ओर अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती मना रही है और दूसरी ओर उनकी स्मृतियों को नुकसान पहुंचा रही है। कांग्रेस ने मांग की है कि घाट पर चल रहा कार्य तुरंत रोका जाए और धार्मिक गुरुओं व स्थानीय संत समाज से परामर्श के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए। साथ ही मुख्यमंत्री को चुनौती दी गई कि यदि मूर्तियां सुरक्षित हैं तो उन्हें मीडिया के सामने सार्वजनिक रूप से दिखाया जाए।

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कांग्रेस के सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो भ्रामक हैं और कुछ तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से तैयार किए गए हैं। मुख्यमंत्री का दावा है कि किसी भी मंदिर या प्रतिमा को क्षति नहीं पहुंचाई गई है और अहिल्याबाई होल्कर की प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित है, जिसे संरक्षण में रखकर सम्मानपूर्वक पुनर्स्थापित किया जाएगा।

सीएम योगी ने कांग्रेस पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के समय भी इसी तरह की अफवाहें फैलाई गई थीं। उन्होंने दोहराया कि सरकार काशी की आस्था, परंपरा और विरासत की रक्षा करते हुए ही विकास कार्य कर रही है।

मणिकर्णिका घाट का यह विवाद अब धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और राजनीति के त्रिकोण में फंसता नजर आ रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी हलचल और तेज होने की संभावना है।