पेरिस। फ्रांस में राजनीतिक हलचल तेज़ हो गई है। प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बेरो को संसद में अविश्वास प्रस्ताव का सामना करना पड़ा, जिसमें वे बहुमत जुटाने में नाकाम रहे। इसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा देने का ऐलान कर दिया है।
संसद में हुए मतदान में विपक्षी दलों ने बेरो सरकार के खिलाफ एकजुट होकर वोट डाला। लंबे समय से बढ़ती महंगाई, सामाजिक असंतोष और सरकार की नीतियों पर सवाल उठ रहे थे। विपक्ष का आरोप है कि बेरो की सरकार जनता की समस्याओं से निपटने में विफल रही है।
प्रधानमंत्री का इस्तीफ़ा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है। अब उन्हें नया प्रधानमंत्री चुनना होगा या फिर संसद भंग कर जल्द चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति फ्रांस की राजनीतिक स्थिरता पर गहरा असर डाल सकती है।
सड़क पर आम लोगों में भी सरकार के खिलाफ नाराज़गी देखी जा रही है। बेरोज़गारी, बढ़ती महंगाई और प्रवासी नीतियों पर असहमति ने लोगों के धैर्य की परीक्षा ले ली है। कई विश्लेषकों का कहना है कि आने वाले दिनों में देश में बड़े विरोध-प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं।
फ्रांस की राजनीति एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। बेरो के इस्तीफ़े के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या मैक्रों नई सरकार बना पाएंगे या फिर फ्रांस को मध्यावधि चुनावों की ओर जाना पड़ेगा।