पंत ने रचा इतिहास: धोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा, 148 साल में ऐसा करने वाले पहले विदेशी विकेटकीपर बने

पंत ने रचा इतिहास: धोनी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ा, 148 साल में ऐसा करने वाले पहले विदेशी विकेटकीपर बने

भारतीय टेस्ट टीम के उप-कप्तान और विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत ने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टेस्ट मैच में इतिहास रच दिया है। उन्होंने न सिर्फ पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी का रिकॉर्ड तोड़ा, बल्कि एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो इंग्लैंड की क्रिकेट इतिहास में पिछले 148 वर्षों में कोई भी विदेशी विकेटकीपर हासिल नहीं कर सका।

तीसरे टेस्ट के तीसरे दिन पंत ने 74 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली, हालांकि वह दुर्भाग्यपूर्ण रूप से रन आउट होकर अपने शतक से चूक गए। लेकिन इस पारी ने उन्हें कई रिकॉर्ड्स की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया।

धोनी का रिकॉर्ड टूटा

पंत ने इंग्लैंड की धरती पर किसी एक टेस्ट सीरीज़ में सबसे अधिक रन बनाने वाले भारतीय विकेटकीपर का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यह रिकॉर्ड इससे पहले एमएस धोनी के नाम था, जिन्होंने 2014 की सीरीज़ में 349 रन बनाए थे। लेकिन पंत अब इस आंकड़े को पार करते हुए इंग्लैंड में 416 रन बना चुके हैं, वह भी मात्र तीन टेस्ट मैचों की पहली पारियों तक।

148 साल में पहली बार ऐसा

पंत अब इंग्लैंड की सरज़मीं पर सबसे ज्यादा रन बनाने वाले विदेशी विकेटकीपर बन गए हैं। इंग्लैंड में अब तक कोई भी विदेशी विकेटकीपर 400 रन के आंकड़े को नहीं छू सका था। पंत ने यह कारनामा 83.20 की शानदार औसत से किया है।

अर्द्धशतकों में भी धोनी की बराबरी

74 रन की पारी के साथ पंत ने इंग्लैंड में अपने करियर की आठवीं अर्द्धशतकीय पारी खेली। यह उपलब्धि भी एमएस धोनी के रिकॉर्ड की बराबरी है, जिन्होंने 23 पारियों में 8 अर्द्धशतक लगाए थे। खास बात यह है कि पंत ने यह आंकड़ा सिर्फ 22 पारियों में ही हासिल कर लिया।

हाल की पारियों में शानदार प्रदर्शन

लॉर्ड्स टेस्ट की पहली पारी तक पंत की इंग्लैंड में पिछली 8 पारियों पर नजर डालें तो उन्होंने 7 बार पचास या उससे ज्यादा रन बनाए हैं। उनका स्कोर क्रमशः 50, 146, 57, 134, 118, 25, 65 और 74 रहा है। इससे साफ है कि पंत इंग्लैंड की परिस्थितियों में न सिर्फ खुद को ढाल चुके हैं, बल्कि उन्हें सबसे खतरनाक बल्लेबाजों में भी शुमार किया जा रहा है।

आने वाले मुकाबलों में और इतिहास बनने की उम्मीद

यह पांच मैचों की टेस्ट सीरीज़ अभी जारी है और अगर पंत का फॉर्म ऐसा ही बना रहा तो वह न सिर्फ रिकॉर्ड बुक में कई और पन्ने जोड़ेंगे, बल्कि अगली पीढ़ी के लिए एक प्रेरणादायक मानक भी स्थापित करेंगे।