नई दिल्ली | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट के 23वें संस्करण में संबोधित करते हुए कहा कि आर्थिक सुस्ती के एक दौर को ‘हिंदू रेट ऑफ़ ग्रोथ’ कहना हिंदू समाज और उसकी जीवनशैली को बदनाम करने का प्रयास था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब दुनिया विभाजित और अनिश्चितताओं से घिरी हुई है, तब भारत एक “ब्रिज बिल्डर” के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने कहा, “21वीं सदी का एक चौथाई हिस्सा बीत चुका है। इस दौरान वैश्विक आर्थिक संकट, महामारी जैसी चुनौतियों ने पूरी दुनिया को प्रभावित किया, लेकिन इन्हीं परिस्थितियों में भारत एक अलग लीग में खड़ा दिखाई देता है। आज देश आत्मविश्वास से भरा हुआ है। जब दुनिया सुस्ती की बात करती है, तब भारत विकास की नई कहानियाँ लिखता है।”
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व सरकारों की कार्यशैली की आलोचना करते हुए कहा कि पहले सिस्टम को अपने नागरिकों पर भरोसा नहीं था।
उन्होंने कहा, “हमने इस सोच को बदल दिया है। अब नागरिक का स्व-प्रमाणित दस्तावेज़ ही उसकी प्रमाणिकता माना जाएगा। सरकार पर जनता का भरोसा ही शासन की सबसे बड़ी पूँजी है।”
उन्होंने बताया कि कई प्रक्रियाओं में अब स्व-घोषणा (Self-Attestation) पर्याप्त होगी, जिससे लालफीताशाही कम होगी। यह बदलाव जन विश्वास विधेयक के तहत किए जा रहे सुधारों का हिस्सा है जिसमें छोटे-छोटे अनुपालनों के अपराधीकरण को समाप्त किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि छोटे व्यापारियों, रेहड़ी-पटरी वालों और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को बिना गारंटी के अब तक 37 लाख करोड़ रुपये के ऋण वितरित किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा, “जो लोग 1,000 रुपये तक का ऋण मांग रहे थे, उन्हें भी बिना जमानत के सहायता मिल रही है। यही जनता पर विश्वास आधारित शासन है।”
पीएम मोदी ने बताया कि देश के विभिन्न खातों में भारी मात्रा में लोगों का अप्राप्त धन पड़ा है –
78,000 करोड़ रुपये बैंकों में,
14,000 करोड़ रुपये बीमा कंपनियों में,
3,000 करोड़ रुपये म्यूचुअल फंड में,
9,000 करोड़ रुपये लाभांश के रूप में।
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाए जा रहे विशेष जिला स्तरीय शिविरों के माध्यम से बड़ी संख्या में नागरिकों को उनकी राशि वापस दिलाई जा रही है।
“यह मोदी है जो लोगों को ढूंढकर उनका हक़ लौटाने की कोशिश कर रहा है,” प्रधानमंत्री ने कहा।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने जनता से 2035 तक ‘औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति’ का संकल्प लेने की अपील की।
हाथ जोड़कर उन्होंने कहा, “मैं अकेले यह लक्ष्य हासिल नहीं कर सकता। हमें दूसरों के पदचिह्नों पर चलने के बजाय अपनी राह बड़ी करनी होगी और हर बाधा के बावजूद आगे बढ़ना होगा।”