पीएम मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ बनी वैश्विक पहचान, अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में दिखी नई केमिस्ट्री

पीएम मोदी की ‘कार डिप्लोमेसी’ बनी वैश्विक पहचान, अंतरराष्ट्रीय रिश्तों में दिखी नई केमिस्ट्री

नई दिल्ली।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कूटनीतिक शैली एक बार फिर वैश्विक मंच पर चर्चा में है। हाल के अंतरराष्ट्रीय दौरों और शिखर बैठकों में उनकी तथाकथित ‘कार डिप्लोमेसी’ ने न केवल सुर्खियाँ बटोरीं, बल्कि भारत की सॉफ्ट पावर को भी मजबूती दी है।

रूस और ब्रिटेन के बाद अब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के राष्ट्रपति के साथ प्रधानमंत्री मोदी की सहज और आत्मीय केमिस्ट्री देखने को मिली। द्विपक्षीय मुलाकातों के दौरान राष्ट्राध्यक्षों के साथ एक ही वाहन में संवाद, अनौपचारिक बातचीत और व्यक्तिगत गर्मजोशी ने पारंपरिक कूटनीति को नया आयाम दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘कार डिप्लोमेसी’ केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि विश्वास निर्माण की एक प्रभावी रणनीति है। औपचारिक बैठकों से अलग इस तरह के संवाद से आपसी समझ गहरी होती है और जटिल मुद्दों पर सहमति बनाना आसान होता है।

प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी जर्मनी, ब्रिटेन और रूस जैसे देशों के शीर्ष नेताओं के साथ इसी तरह के अनौपचारिक क्षणों में नज़र आ चुके हैं। इन तस्वीरों और पलों ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत की सकारात्मक छवि को मजबूत किया है।

कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, प्रधानमंत्री की यह शैली भारत को केवल एक रणनीतिक साझेदार ही नहीं, बल्कि भरोसेमंद मित्र के रूप में भी स्थापित कर रही है। बदलते वैश्विक परिदृश्य में मोदी की यह ‘पर्सनल टच डिप्लोमेसी’ भारत के विदेश नीति दृष्टिकोण को नई धार दे रही है।