सिडनी, 22 फरवरी 2026
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री Anthony Albanese ने बोंडी आतंकी हमले के पीड़ितों की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा के दौरान हुई हूटिंग पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा है कि उस समय उनकी प्राथमिकता खुद नहीं, बल्कि देश की सुरक्षा और पीड़ित परिवारों का साथ देना था।
प्रधानमंत्री को उस कार्यक्रम में कुछ लोगों के विरोध का सामना करना पड़ा था। बताया गया कि उनकी सुरक्षा टीम को एक व्यक्ति को रोकना पड़ा, जो उनकी ओर तेजी से बढ़ा था। हालांकि अल्बनीज़ ने कहा कि विरोध करने वालों की संख्या बहुत कम थी।
उन्होंने एक टीवी इंटरव्यू में कहा,
“वहां मौजूद लोगों में से केवल कुछ ही लोगों ने ऐसा किया। मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण वे परिवार थे, जिन्होंने 14 दिसंबर को अपने प्रियजनों को खोया। मैं उनके घरों में गया, उनसे मिला — वे बेहद गर्मजोशी और सम्मान के साथ मिले। उसी पर मेरा ध्यान था।”
प्रधानमंत्री ने कहा कि हमले के तुरंत बाद राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक बुलाई गई थी ताकि स्थिति का आकलन किया जा सके। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की गई कि क्या हमलावर किसी आतंकी नेटवर्क से जुड़े थे, क्या यह अकेली घटना थी या इसके अंतरराष्ट्रीय संबंध थे।
दिसंबर में सिडनी के प्रसिद्ध बोंडी बीच पर एक चानुक्का (यहूदी धार्मिक आयोजन) के दौरान हुए हमले में 15 निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इसे ऑस्ट्रेलिया की धरती पर अब तक का सबसे भीषण आतंकी हमला माना जा रहा है।
हमले के दौरान पुलिस कार्रवाई में संदिग्ध Sajid Akram मारा गया था, जबकि उसका बेटा Naveed Akram गिरफ्तार किया गया। उस पर 15 हत्या सहित कुल 59 आपराधिक मामलों में आरोप लगाए गए हैं।
बताया गया है कि नावीद अकरम पहले खुफिया एजेंसियों की निगरानी सूची में था, लेकिन बाद में उसका नाम सूची से हटा दिया गया। इसी मुद्दे को लेकर सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं।
प्रधानमंत्री से जब पूछा गया कि क्या यह हमला ऑस्ट्रेलियाई सुरक्षा एजेंसी की विफलता थी, तो उन्होंने सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए गठित रॉयल कमीशन को अपना काम पूरा करने दिया जाना चाहिए।
ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गनाइजेशन (ASIO) के प्रमुख Mike Burgess की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं, लेकिन प्रधानमंत्री ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की।
सरकार ने इस हमले की व्यापक जांच के लिए वरिष्ठ पूर्व नौकरशाह Dennis Richardson को समीक्षा का जिम्मा सौंपा है। रिचर्डसन इससे पहले रक्षा और विदेश मंत्रालय में शीर्ष पदों पर रह चुके हैं और अमेरिका में ऑस्ट्रेलिया के राजदूत भी रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने दोहराया कि “सबसे पहली जिम्मेदारी लोगों को सुरक्षित रखना है” और सरकार इस दिशा में हर जरूरी कदम उठा रही है।
इस बीच, विपक्ष और आम जनता के एक वर्ग ने खुफिया एजेंसियों की निगरानी व्यवस्था और हथियारों की उपलब्धता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। रॉयल कमीशन की रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई।