ऑप्टस संकट में, सीईओ स्टीफन रू के सामने सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

ऑप्टस संकट में, सीईओ स्टीफन रू के सामने सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा

सिडनी। ऑस्ट्रेलिया की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी ऑप्टस (Optus) इस समय अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। हाल के महीनों में बार-बार नेटवर्क फेल होना, लाखों उपभोक्ताओं की सेवाएँ बाधित होना और ग्राहक सहायता तंत्र की नाकामी ने कंपनी की साख को गहरा धक्का दिया है। अब कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्टीफन रू के सामने चुनौती है कि वे तेजी और मजबूती से बदलाव कर ऑप्टस को बचा पाते हैं या नहीं।

ग्राहकों का भरोसा डगमगाया

पिछले साल के बड़े नेटवर्क ब्लैकआउट के बाद से कंपनी लगातार आलोचना झेल रही है। लाखों उपभोक्ता घंटों तक मोबाइल, इंटरनेट और कॉल सेवाओं से वंचित रहे। कई व्यवसायों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। ग्राहक सेवा हेल्पलाइन पर समय पर समाधान न मिलने से गुस्सा और बढ़ गया। उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल तकनीकी खराबी नहीं बल्कि "संगठनात्मक असफलता" का नतीजा है।

आंतरिक ढांचे में खामियाँ

कंपनी को सुधारने की राह में सबसे बड़ी बाधा उसका पुराना और कमजोर संचालन ढांचा है। निर्णय लेने की धीमी प्रक्रिया, जटिल प्रबंधन प्रणाली और पुरानी कार्यप्रणाली ने हालात को और गंभीर बना दिया है। जानकारों का मानना है कि जब तक इन बुनियादी ढांचागत खामियों को दूर नहीं किया जाता, केवल सतही सुधार से स्थिति नहीं बदलेगी।

स्टीफन रू पर दबाव

सीईओ स्टीफन रू ने पद संभालने के बाद ग्राहकों से वादा किया था कि सेवाओं में गुणवत्ता लाने और विश्वास लौटाने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। लेकिन आलोचकों का कहना है कि अब तक उनके कदम धीमे रहे हैं और मौजूदा संकट को देखते हुए उनसे कहीं अधिक आक्रामक और निर्णायक नेतृत्व की ज़रूरत है।

भविष्य की राह कठिन

ऑस्ट्रेलिया का दूरसंचार क्षेत्र बेहद प्रतिस्पर्धी है, जहाँ टेल्स्ट्रा और अन्य कंपनियाँ लगातार बेहतर सेवाओं के दम पर बाजार में मजबूत पकड़ बनाए हुए हैं। ऐसे में अगर ऑप्टस समय रहते सुधार नहीं करता तो न केवल बाजार हिस्सेदारी घटेगी बल्कि उपभोक्ताओं का खोया विश्वास वापस पाना भी मुश्किल हो जाएगा।