द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नर्सों पर जापानी सैनिकों का भयावह हमला – नए सबूत सामने आए

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ऑस्ट्रेलियाई नर्सों पर जापानी सैनिकों का भयावह हमला – नए सबूत सामने आए

सिडनी, 28 जून 2025 – द्वितीय विश्व युद्ध के एक काले अध्याय में, अब नई ऐतिहासिक जानकारी सामने आई है जिसने दुनिया को झकझोर दिया है। प्रसिद्ध इतिहासकार लिनेट रैमसे सिल्वर द्वारा सामने लाई गई जानकारी के अनुसार, फरवरी 1942 में जापानी सैनिकों द्वारा ऑस्ट्रेलियाई सेना की नर्सों पर किए गए क्रूर हमले से जुड़े नए सबूत उजागर हुए हैं।

जब सिंगापुर जापानी सेनाओं के हाथों गिरने ही वाला था, तब 65 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई नर्सों को लेकर 'वाइनर ब्रूक' नामक एक जहाज़ सुमात्रा की ओर निकला। यह जहाज़ रास्ते में जापानी विमानों द्वारा बमबारी का शिकार हो गया और डूब गया। जिन नर्सों ने किसी तरह तैरकर इंडोनेशिया के बैंक्का द्वीप तक पहुँचना संभव किया, उन्हें एक और त्रासदी का सामना करना पड़ा।

इनमें से 53 नर्स जीवित बच गई थीं और दो दिन बाद, जब वे रेडजी बीच नामक स्थान पर एकत्र थीं, तो जापानी सैनिकों ने उन्हें खड़ा कर के मशीनगनों से गोलियों से भून दिया। 21 नर्सों की मौके पर ही मौत हो गई। इस भयानक नरसंहार से मात्र एक नर्स, सिस्टर विवियन बुलविंकल, जीवित बचीं। उन्हें कमर के पास एक गोली लगी थी, लेकिन उन्होंने घने जंगल में छुपकर अपनी जान बचाई।

नए दस्तावेज और चश्मदीदों के बयान

इतिहासकार सिल्वर के अनुसार, हाल में मिले दस्तावेजों और कुछ स्थानीय नागरिकों की गुप्त रिपोर्टों से यह पता चला है कि हमले से पहले नर्सों को कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक प्रताड़नाओं का भी सामना करना पड़ा था। इन दस्तावेजों से यह भी पुष्टि हुई है कि जापानी सेना ने जानबूझकर अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संधियों का उल्लंघन किया।

ऑस्ट्रेलियाई सरकार की प्रतिक्रिया

ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने इस रिपोर्ट पर गहरा दुख जताया है और कहा है कि इन नर्सों की कुर्बानी को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाया जाएगा। "वे सिर्फ नर्स नहीं थीं, वे शांति, सेवा और साहस की प्रतिमूर्ति थीं," उन्होंने कहा।

इतिहास की पुनर्रचना की मांग

अब जब ये सबूत सामने आ चुके हैं, इतिहासकार और मानवाधिकार संगठन मांग कर रहे हैं कि इन घटनाओं को इतिहास की पुस्तकों में उचित स्थान दिया जाए और जापान की सरकार से इस अमानवीय कृत्य के लिए माफ़ी की माँग की जाए।

यह घटना न केवल युद्ध की क्रूरता का प्रमाण है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि मानवता किस स्तर तक गिर सकती है। सिस्टर बुलविंकल की गवाही और अब उजागर हुईं जानकारियाँ आने वाली पीढ़ियों को सच से अवगत कराएँगी।