लखनऊ।
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन के मौके पर पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए स्पष्ट रणनीति का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि बसपा पूरी मजबूती के साथ अकेले दम पर चुनाव लड़ेगी और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी।
मायावती ने एक बार फिर अपने पुराने और सफल ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम सामाजिक समीकरण (2007 का फॉर्मूला) को केंद्र में लाने पर जोर दिया है। पार्टी का मानना है कि यही संतुलन उत्तर प्रदेश में स्थायी और मजबूत सरकार दे सकता है।
बसपा ने मुस्लिम भाईचारा कमेटियों को जिलों में फिर से सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य समाजवादी पार्टी और कांग्रेस की ओर झुके मुस्लिम मतदाताओं को वापस बसपा से जोड़ना है। पार्टी नेताओं को जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने और भरोसा कायम करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बसपा नेतृत्व गैर-दलित पिछड़ी जातियों और सवर्ण समाज को भी अपने साथ जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहा है। पार्टी का कहना है कि उसका लक्ष्य किसी एक वर्ग नहीं, बल्कि पूरे समाज के हितों की रक्षा करना है।
पार्टी ने संगठन को और मजबूत करने के लिए सेक्टर व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। तीन मंडलों पर आधारित एक सेक्टर की व्यवस्था को समाप्त कर अब सीधे मंडलीय व्यवस्था लागू की गई है, ताकि संगठनात्मक कामकाज अधिक प्रभावी और तेज हो सके।
बसपा ने बामसेफ (BAMCEF) को भी नए सिरे से मजबूत करने का निर्णय लिया है। हर जिले में एक अध्यक्ष और 10 उपाध्यक्ष तैनात किए जाएंगे, जो पढ़े-लिखे कर्मचारियों, युवाओं और बुद्धिजीवियों के बीच बसपा की विचारधारा का प्रचार करेंगे।
मायावती ने कार्यकर्ताओं को “सावधान और सतर्क” रहने की सलाह देते हुए कहा कि विपक्षी दल जानबूझकर बसपा को ‘बीजेपी की बी-टीम’ बताकर भ्रम फैलाते हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस बार घर-घर जाकर यह संदेश देना होगा कि बसपा स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ रही है और सत्ता में लौटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पूरे प्रदेश में होर्डिंग्स और पोस्टरों के जरिए मायावती के चार कार्यकालों (1995, 1997, 2002 और 2007) के दौरान किए गए विकास कार्यों और “कानून के राज” को जनता के सामने रखा जा रहा है। पार्टी का दावा है कि मौजूदा और पूर्ववर्ती सरकारों के जंगलराज और जातिवादी राजनीति से जनता परेशान हो चुकी है और बसपा ही एकमात्र मजबूत विकल्प है।
बसपा नेतृत्व का मानना है कि यदि संगठन, सामाजिक समीकरण और जमीनी संपर्क एक साथ मजबूत हुए, तो 2027 में पार्टी की सत्ता में वापसी तय है।