दिल्ली एयरपोर्ट पर तकनीकी गड़बड़ी से ठप हुईं 700 उड़ानें, हजारों यात्री फंसे — कई घंटे बाद बहाल हुई सेवाएं

दिल्ली एयरपोर्ट पर तकनीकी गड़बड़ी से ठप हुईं 700 उड़ानें, हजारों यात्री फंसे — कई घंटे बाद बहाल हुई सेवाएं

दिल्ली एयरपोर्ट पर मची अफरा-तफरी

देश की राजधानी नई दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा (IGI Airport) शुक्रवार को एक बड़ी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से ठप पड़ गया। सुबह से लेकर देर शाम तक करीब 700 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें से कई को रद्द करना पड़ा और कई घंटों की देरी से रवाना किया गया।

यह स्थिति इतनी गंभीर थी कि एयरपोर्ट के तीनों टर्मिनल (T1, T2 और T3) पर यात्रियों की भीड़ उमड़ आई। फंसे हुए यात्रियों में कई विदेशी यात्री भी शामिल थे। एयरलाइंस के काउंटरों पर लंबी कतारें लग गईं और सुरक्षा जांच व बोर्डिंग प्रक्रियाओं में भी भारी देरी हुई।


तकनीकी गड़बड़ी कहां हुई?

विमानन सूत्रों के अनुसार, यह समस्या एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से जुड़े एक अहम सिस्टम में आई थी। शुरुआत में इसे “ATC सर्वर डाउन” बताया गया, लेकिन बाद में स्पष्ट किया गया कि गड़बड़ी ऑटोमेटिक मैसेज स्विचिंग सिस्टम (Automatic Message Switching System - AMSS) में हुई थी।

यह सिस्टम उड़ानों के संचालन से जुड़ी तकनीकी सूचनाओं — जैसे उड़ान मार्ग, ऊंचाई, मौसम, और एयर ट्रैफिक रूट्स — को स्वचालित रूप से विभिन्न एयरपोर्ट और कंट्रोल सेंटर्स तक पहुंचाता है। सिस्टम फेल होने की वजह से विमानन संचार बाधित हो गया और एयरलाइंस को अपने उड़ानों की प्लानिंग मैनुअल रूप से करनी पड़ी, जिससे भारी देरी हुई।


कैसे उजागर हुई खराबी

शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे के आसपास, जब घरेलू उड़ानों का व्यस्त समय शुरू हुआ, तब एयरपोर्ट के तकनीकी विभाग को डेटा ट्रांसमिशन में दिक्कतें दिखने लगीं। शुरुआत में तकनीशियन इसे लोकल नेटवर्क फॉल्ट मान रहे थे, लेकिन कुछ ही मिनटों में पूरे ATC सिस्टम में संचार ठप पड़ गया

करीब दो घंटे तक उड़ानों की क्लियरेंस नहीं मिल सकी, जिससे एयरलाइंस ने टेक-ऑफ रोक दिया। कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को डाइवर्ट भी करना पड़ा।


क्या साइबर अटैक हुआ था?

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में इस तकनीकी गड़बड़ी के पीछे साइबर अटैक या मालवेयर (malware) की आशंका जताई गई थी। हालांकि, सरकारी सूत्रों और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने इस संभावना को खारिज करते हुए कहा कि “यह एक तकनीकी फॉल्ट था, किसी बाहरी हस्तक्षेप या हैकिंग का मामला नहीं।”

सूत्रों के मुताबिक, यह खराबी सर्वर सॉफ्टवेयर अपडेट के दौरान आई असंगति की वजह से हुई। कुछ सिस्टम्स ने नए डेटा प्रोटोकॉल को नहीं अपनाया, जिससे पूरी नेटवर्क चेन अस्थायी रूप से फेल हो गई।


AAI और एयरलाइंस की प्रतिक्रिया

एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने दोपहर में बयान जारी कर यात्रियों से धैर्य बनाए रखने की अपील की और कहा कि विशेषज्ञों की टीम “राउंड-द-क्लॉक” काम कर रही है। रात करीब 9 बजे AAI ने पुष्टि की कि “सिस्टम को पूरी तरह बहाल कर लिया गया है और अब सभी उड़ानों का संचालन सामान्य रूप से शुरू हो गया है।”

वहीं एयरलाइंस कंपनियों ने यात्रियों से अनुरोध किया है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ानों की स्थिति ऑनलाइन चेक करें। कई एयरलाइंस ने यात्रियों को मुफ्त रीबुकिंग या रिफंड की सुविधा भी दी।


यात्रियों की परेशानी

एयरपोर्ट पर फंसे यात्रियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

  • टर्मिनल 3 पर सुबह से लंबी लाइनों में खड़े यात्रियों ने सोशल मीडिया पर नाराज़गी जताई।

  • बच्चों और बुजुर्गों के साथ यात्रियों को बैठने की जगह तक नहीं मिल पाई।

  • कई लोगों ने बताया कि एयरलाइंस की ओर से सूचना समय पर नहीं दी गई, जिससे असमंजस की स्थिति बनी रही।

एक यात्री ने बताया, “हम सुबह 8 बजे से यहां हैं। पहले कहा गया कि उड़ान 30 मिनट लेट है, फिर दो घंटे, और अब रात के बाद रवाना होने की बात हो रही है। कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है।”


विशेषज्ञों की राय

विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना बताती है कि भारत के एविएशन सेक्टर में अब भी तकनीकी रिडंडेंसी (backup systems) पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।
एविएशन एनालिस्ट कैप्टन एस. बख्शी ने कहा,

“AMSS जैसा सिस्टम किसी भी एयरपोर्ट के लिए नर्व सेंटर की तरह होता है। इसका बैकअप सर्वर और वैकल्पिक नेटवर्क हर समय तैयार रहना चाहिए। अगर IGI जैसे बड़े हब में ऐसा फेल्योर हो सकता है, तो यह चिंता की बात है।”


क्या सीख मिली?

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या देश के हवाईअड्डों पर इस्तेमाल होने वाले तकनीकी सिस्टम आधुनिक हैं और साइबर सुरक्षा व डेटा अखंडता के लिहाज से पर्याप्त रूप से सुरक्षित हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि AAI को सभी प्रमुख एयरपोर्ट्स पर अपने IT इंफ्रास्ट्रक्चर का ऑडिट कराना चाहिए और AMSS जैसे महत्वपूर्ण सिस्टम्स के क्लाउड-आधारित बैकअप तैयार रखने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।